सोफिया फिरदौस ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल: एक कमरे में कई कक्षाएं, 'मछली बाजार' बने स्कूल

सोफिया फिरदौस ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा- एक कमरे में चल रही कई क्लासेस


भुवनेश्वर, 21 फरवरी। कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था, कल्याणकारी योजनाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने विधानसभा में सवाल उठाते हुए कहा कि ओडिशा में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं, जहां एक ही कक्षा में कई कक्षाओं के छात्रों को पढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने आईएएनएस से बताया कि उनके सवाल के जवाब में सामने आया कि राज्य में 1,898 ऐसे स्कूल हैं, जहां एक ही कमरे में एक से अधिक कक्षाएं संचालित हो रही हैं। सोफिया फिरदौस ने इसे बेहद चौंकाने वाला बताते हुए कहा कि यह शिक्षा प्रणाली के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है और बच्चों के शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन भी है।

कांग्रेस विधायक ने कहा कि पहली, दूसरी और पांचवीं कक्षा के बच्चों को एक साथ एक कमरे में पढ़ाना किसी 'मछली बाजार' जैसी स्थिति पैदा करता है। ऐसे माहौल में न शिक्षक सही ढंग से पढ़ा सकते हैं और न ही बच्चे ठीक से समझ पाते हैं। प्राथमिक विद्यालय ही बच्चों के भविष्य की नींव होते हैं और यदि वहीं बुनियादी शिक्षा सही नहीं मिलेगी तो भविष्य की पीढ़ी कैसे सक्षम और आत्मनिर्भर बन पाएगी?

सोफिया फिरदौस ने राज्य सरकार से मांग की कि इसी बजट वर्ष में इन स्कूलों के लिए तत्काल आपातकालीन फंड जारी किया जाए, ताकि अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण हो सके और बच्चों को बेहतर शिक्षण वातावरण मिल सके। यह समस्या रातों-रात पैदा नहीं हुई है, बल्कि लंबे समय से उपेक्षा का परिणाम है, और पिछले 20 महीनों में भी इस दिशा में ठोस पहल नहीं की गई।

कल्याणकारी योजनाओं और 'फ्रीबीज' पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि अदालत का दृष्टिकोण सम्माननीय है और यह सही है कि सरकारों को लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने ओडिशा की सुभद्रा योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि लोगों को छोटी-छोटी किस्तों में 5,000 रुपए देने के बजाय एकमुश्त 50,000 रुपए दिए जाएं और उसके सही उपयोग के लिए मार्गदर्शन किया जाए, तो महिलाएं अधिक आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

कांग्रेस विधायक ने आगे कहा कि कल्याणकारी योजनाओं की सबसे बड़ी कमी उचित निगरानी और मार्गदर्शन की है। यदि योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो, लाभार्थियों को सही दिशा दी जाए और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए, तो ये योजनाएं वास्तव में समाज के निचले स्तर तक सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।

एआई और तकनीकी विकास के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत में सूचना प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर क्रांति की नींव पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने रखी थी। उनके प्रयासों ने देश में तकनीकी बदलाव का रास्ता तैयार किया, जिसका प्रभाव आज भी दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि एआई के अपने फायदे और नुकसान दोनों हैं। इसलिए इसे सही दिशा, सही नीति और उचित नियंत्रण के साथ लागू करना जरूरी है। केवल सम्मेलन या शिखर बैठक आयोजित करने से बदलाव नहीं आता, बल्कि उसके परिणामों को जमीन पर लागू करना और दुरुपयोग को रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। एआई एक व्यापक विषय है, जिसके लिए गहरी समझ और मजबूत नियामक व्यवस्था की आवश्यकता है।
 

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