नई दिल्ली, 20 फरवरी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) की विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में दलहन एवं तिलहन की खरीद व्यवस्था, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का पूरा लाभ सुनिश्चित करने और संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श किया गया।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर आयोजित बैठक के दौरान मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) एवं मूल्य स्थिरीकरण निधि (पीएसएफ) के तहत संचालित खरीद कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एमएसपी पर खरीद को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य बिना किसी विलंब के प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने पर बल दिया कि खरीद केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध हों और किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। विशेष रूप से तुअर, उड़द तथा मसूर जैसी प्रमुख दलहनों के उत्पादन एवं खरीद को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि इन फसलों के लिए प्रस्तावित 6 वर्षीय “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन” के तहत उत्पादन वृद्धि, उन्नत बीजों की उपलब्धता, तकनीकी सहयोग एवं प्रभावी विपणन तंत्र विकसित करने पर चर्चा हुई। इस मिशन का उद्देश्य देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।
चौहान ने कहा कि किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर सीधे सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्यों के साथ समन्वय मजबूत किया जाए तथा खरीद एवं भंडारण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, जिससे बाजार में मूल्य स्थिरता बनी रहे और किसानों के हितों की रक्षा हो सके।
बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव डॉ देवेश चतुर्वेदी, अपर सचिव प्रमोद कुमार मेहरदा, अपर सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी, नाफेड के प्रबंध निदेशक दीपक अग्रवाल एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।