गुजरात सरकार का बड़ा फैसला: पहचान छिपाकर शादी पर रोक, अब माता-पिता की सहमति बेटियों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य

पहचान छिपाकर विवाह पर रोक के लिए गुजरात सरकार लाई संशोधन प्रस्ताव, माता-पिता की भागीदारी अनिवार्य


गांधीनगर, 20 फरवरी। गुजरात सरकार ने विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से गुजरात रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिज एक्ट, 2006 में महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित किए हैं।

भूपेंद्र पटेल सरकार ने कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य बेटियों की सुरक्षा, सामाजिक परंपराओं की रक्षा और विवाह प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री हर्ष संघवी ने विधानसभा में नियम 44 के तहत इन संशोधनों की जानकारी देते हुए उन्हें 'अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील' बताया। उन्होंने कहा कि अब विवाह पंजीकरण प्रक्रिया में माता-पिता की औपचारिक भागीदारी अनिवार्य होगी और इसके लिए एक अलग डिजिटल पोर्टल बनाया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत विवाह पंजीकरण के समय माता-पिता को आधिकारिक सूचना भेजी जाएगी और उनकी सहमति प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा मानी जाएगी। आवेदन के साथ दोनों पक्षों और दो गवाहों को नोटरीकृत दस्तावेज जमा करने होंगे। पहचान के लिए आधार कार्ड, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे प्रमाण अनिवार्य होंगे। माता-पिता को अपना पूरा नाम, पता, आधार नंबर और मोबाइल नंबर भी देना होगा।

हर्ष संघवी ने स्पष्ट किया कि सरकार प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं है, लेकिन धोखे या दबाव के मामलों को रोकना उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विवाह हिंदू परंपरा के 16 पवित्र संस्कारों में से एक है और पहचान छिपाकर किसी बेटी को फंसाना गंभीर अपराध है।

डिप्टी सीएम ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति सलीम, सुरेश जैसा बनकर राज्य की बेटी को फंसाने की कोशिश करेगा, तो यह सरकार ऐसा काम करेगी कि वह भविष्य में किसी बेटी की तरफ देखने की भी हिम्मत नहीं करेगा।

यह निर्णय पंचमहल जिले में सामने आए मामलों के बाद लिया गया, जहां कनकोडाकुई और नाथकुवा जैसे गांवों में सैकड़ों निकाह प्रमाणपत्र जारी किए गए, जबकि वहां मुस्लिम परिवार मौजूद नहीं थे। सरकार का कहना है कि पहचान छिपाकर विवाह करना संस्कृति पर हमला है और इसे रोकना आवश्यक है।

संशोधित प्रक्रिया के तहत सहायक रजिस्ट्रार आवेदन मिलने के 10 कार्य दिवस के भीतर माता-पिता को सूचना देंगे और आवेदन को जिला या तालुका रजिस्ट्रार को भेजेंगे। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 30 दिनों में विवाह पंजीकरण किया जाएगा और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रमाणपत्र जारी होगा, जिसमें सीरियल नंबर, पेज नंबर और वॉल्यूम विवरण शामिल होंगे।

गृह मंत्री ने बताया कि इन संशोधनों से पहले मुख्यमंत्री से परामर्श किया गया और सामाजिक संगठनों के साथ 30 दौर की चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण और स्थानीय गवाहों की उपस्थिति से प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

सरकार ने नए नियमों पर जनता से सुझाव और आपत्तियां भी आमंत्रित की हैं, जिन्हें अगले 30 दिनों तक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भेजा जा सकता है। प्राप्त सुझावों की संवैधानिक सीमाओं के भीतर समीक्षा कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

हर्ष संघवी ने कहा कि बेटी परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर है। प्रेम विवाह का विरोध नहीं है, लेकिन छल और दबाव के मामलों में सख्त कार्रवाई होगी। सरकार ने दोहराया कि वह हर बेटी की गरिमा और प्राचीन परंपराओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
 
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