लखनऊ (उत्तर प्रदेश) 25 अगस्त: एक थप्पड़ ने पूरे मामले को हिंसा की उस हद तक पहुंचा दिया, जहां सच और दावों की गोलियां चलनी शुरू हो गईं। लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र में सोमवार को सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और एक किसान परिवार के बीच जमकर हाथापाई हुई। जहां एक तरफ प्रशासन ने कानून का पालन करने का दावा किया, वहीं दूसरी ओर एक नायब तहसीलदार के थप्पड़ ने पूरे मामले को विवादों के घेरे में ला दिया।
क्या है पूरा मामला? जानिए जमीन विवाद की पूरी कहानी
यह विवाद लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र के मस्तेमऊ गांव की है। यहां खसरा नंबर 868 पर करीब 0.152 हेक्टेयर सरकारी जमीन है, जिसकी कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। अभिलेखों में इस जमीन को ‘खाद का गड्ढा’ दर्ज किया गया है। इसी जमीन के करीब 3000 वर्गफुट हिस्से पर एक किसान परिवार ने कब्जा जमा रखा था। नगर निगम को इस अवैध कब्जे की शिकायत मिलने के बाद जोन-4 की टीम नायब तहसीलदार रत्नेश श्रीवास्तव के नेतृत्व में वहां पहुंची।
कार्रवाई के दौरान क्यों भड़का तनाव? दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
प्रशासन की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक, टीम ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाने का काम शुरू किया। लेकिन अवैध कब्जा करने वाले लोगों ने जमकर विरोध किया। उन पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगे हैं।
वहीं, दूसरी ओर स्थानीय पार्षद राजेश कुमार ने किसान का पक्ष रखा। उनके मुताबिक, किसान राम मिलन का इस जमीन पर तीन पीढ़ियों से कब्जा रहा है और उनके पास नवाबों के जमाने के कागजात भी हैं। जब टीम ने बुलडोजर चलाना शुरू किया तो राम मिलन ने तहसीलदार से अपने जानवरों के लिए रखा भूसा निकाल लेने की महज एक घंटे की मोहलत मांगी। इसी दौरान नायब तहसीलदार को गुस्सा आ गया और उन्होंने राम मिलन के कान पर जोरदार थप्पड़ मार दिया, जिससे उनके कान से खून बहने लगा।
वीडियो वायरल: थप्पड़ के बाद भड़की महिलाएं, मचा कोहराम
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। थप्पड़ की आवाज के साथ ही मौके पर मौजूद परिवार की महिलाएं आगबबूला हो गईं। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को घेर लिया और जमकर गाली-गलौज की। मामला इतना बिगड़ा कि दोनों तरफ से एक-दूसरे पर अभद्रता और मारपीट के आरोप लगे। राम मिलन को पहले गोसाईगंज सीएचसी और फिर सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें गंभीर हालत में PGI रेफर कर दिया गया।
अब आगे क्या? दोनों तरफ से दर्ज कराई गई शिकायतें
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब मामला कोर्ट-कचहरी तक पहुंच गया है। एक तरफ जहां नगर निगम ने अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सुशांत गोल्फ सिटी थाने में नामजद शिकायत दर्ज कराई है, वहीं किसान परिवार की तरफ से भी तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। नगर निगम के अधिकारियों ने साफ किया है कि सरकारी भूमि पर कब्जे के खिलाफ उनकी कार्रवाई जारी रहेगी।
सवाल ज्यों के त्यों: कानून का राज या अधिकारियों का दंभ?
ये घटना कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। क्या सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाना गलत है? बिल्कुल नहीं। लेकिन क्या इस कार्रवाई को अंजाम देने का तरीका सही था? क्या किसी नागरिक को थप्पड़ मारना किसी भी सूरत में जायज ठहराया जा सकता है? यह मामला सिर्फ एक जमीन के विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक अधिकारों की सीमा और नागरिकों के अधिकारों का एक गंभीर टकराव बन गया है। जनता की नजरें अब प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम में गुनाहगार कौन है – अवैध कब्जा करने वाले या फिर कानून को अपने हाथ में लेने वाले।