देवरिया (उत्तर प्रदेश) 26 अगस्त ।
कल्पना कीजिए, एक सड़क जो दर्जनों गांवों को जोड़ती है, लेकिन अब वो मौत का कुआं बन चुकी है – हर कदम पर गड्ढे, बारिश में दलदल और रोजाना होने वाले हादसे। देवरिया के रुद्रपुर ब्लॉक में परसौना-निबही दाढ़ी मार्ग की ये हालत अब ग्रामीणों के सब्र का इम्तिहान ले रही है।
देवरिया परसौना-निबही दाढ़ी मार्ग जर्जर सड़क की समस्या अब सालों पुरानी हो चुकी है, लेकिन इस बारिश के मौसम में ये और भी विकराल रूप ले चुकी है। कुरैती, गाजीपुर भैसही, सेतुआभार, महेशपुर, पचमा, जोगिया बुज़ुर्ग जैसे दर्जनों गांवों के लोग इसी रोड से गोरखपुर के गजपुर, कौड़ीराम, बड़हलगंज जाते हैं। रोजमर्रा की खरीदारी के लिए पचलड़ी बाजार का रास्ता भी यही है। स्मार्टख़बरी की टीम ने जब ग्रामीणों से बात की, तो पता चला कि हर रोज सैकड़ों बच्चे इसी मार्ग से स्कूल जाते हैं, लेकिन गड्ढों में पानी भरने से साइकिल और मोटरसाइकिल सवार फिसलकर गिरते हैं। जोगिया बुज़ुर्ग की ग्राम प्रधान रूपम दुबे ने हमें बताया कि ये सड़क जोगिया बुज़ुर्ग मोड़ से निबही तक पूरी तरह खराब हो चुकी है। पीडब्ल्यूडी ने इसे लगभग एक दशक पहले बनाया था, लेकिन तब से कोई मरम्मत नहीं हुई। कई बार शिकायत की, लेकिन सुनवाई शून्य।
ग्रामीणों की रोजमर्रा की जंग
स्मार्टख़बरी की टीम रुद्रपुर ब्लॉक पहुंची, जहां सड़क की हालत देखकर हैरान रह गया। जगह-जगह इतने बड़े गड्ढे कि ट्रैक्टर भी फंस जाते हैं। बारिश के पानी से भरे ये गड्ढे अब डेंगू जैसे रोगों का घर बन चुके हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर फैल रहा है। रामप्रीत यादव, एक किसान ने कहा, “भाई साहब, मोटरसाइकिल पर जाते हैं तो गिरने का डर, पैदल जाते हैं तो कीचड़ में फंसने का।” इसी तरह, नवनाथ यादव और बेचन प्रजापति ने बताया कि सड़क की वजह से एम्बुलेंस भी समय पर नहीं पहुंच पाती। पिछले महीने एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाते समय गड्ढे में वाहन फंस गया, किसी तरह बचाया गया।
ये समस्या सिर्फ परसौना-निबही दाढ़ी मार्ग जर्जर सड़क तक सीमित नहीं, बल्कि आसपास की कई सड़कें ऐसी ही हैं। उदाहरण के तौर पर, रुद्रपुर में दूधेश्वर नाथ मंदिर से सतासी स्कूल तक जलभराव ने सड़कें जाम कर रखी हैं। श्रद्धालु और दुकानदार परेशान हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं।
बारिश ने खोली प्रशासन की पोल
उत्तर प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही ऐसी सड़कों की समस्या उभर आती है। देवरिया जैसे जिलों में शहरीकरण तेज है, लेकिन ग्रामीण इलाकों की सड़कें उपेक्षित हैं। रूपम दुबे ने कहा कि उन्होंने कई बार पीडब्ल्यूडी और जिला प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन जवाब मिलता है – बजट नहीं है। ग्रामीणों जैसे श्रीराम मिश्रा, तन्मय दीक्षित, उमाशंकर मिश्रा, दुलारे, रामधारी हरिजन, रामबदन ने मिलकर पुनर्निर्माण की मांग की है। वे कहते हैं कि अगर सड़क नहीं बनी तो आंदोलन करेंगे।
हमने जब लोकल एमएलए डॉ. जयप्रकाश निषाद के पुराने पोस्ट देखे, जहां उन्होंने रुद्रपुर-गौरीबाजार मार्ग का कायाकल्प कराने की बात करते है वो दावा करते हैं कि विरासत में मिली खराब सड़कें अब चमचमाती हैं, लेकिन परसौना-निबही दाढ़ी मार्ग जैसी सड़कें अभी भी इंतजार में हैं। क्या ये मांग उनकी प्राथमिकता में आएगी?
ये जर्जर रोड सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और आर्थिक नुकसान का कारण भी है। बारिश में पानी भरे गड्ढों से मच्छर पनपते हैं, डेंगू का खतरा बढ़ गया है। बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं, क्योंकि रास्ता खतरनाक है। किसान अपनी उपज समय पर बाजार नहीं पहुंचा पाते, जिससे नुकसान होता है।
ग्रामीणों की मांग है कि परसौना-निबही दाढ़ी मार्ग का तुरंत पुनर्निर्माण हो। रूपम दुबे कहती हैं, “हमारे गांवों को जोड़ने वाली ये सड़क अगर ठीक हो जाए तो जीवन आसान हो जाएगा।” प्रशासन को चाहिए कि बजट आवंटित करे और काम की निगरानी करे।