देवरिया (उत्तर प्रदेश) 26 अगस्त: कल्पना कीजिए, एक गांव जहां पानी की टंकी तो खड़ी है लेकिन उससे एक बूंद भी घरों तक नहीं पहुंच रही, और लोग सालों से दूषित पानी पीकर बीमार पड़ रहे हैं। देवरिया के जोगिया बुज़ुर्ग में हर घर जल जीवन मिशन की ये हकीकत अब ग्रामीणों के गुस्से का सबब बन चुकी है।
देवरिया जोगिया बुज़ुर्ग जल जीवन मिशन समस्या की ये कहानी रुद्रपुर तहसील के जोगिया बुज़ुर्ग ग्राम पंचायत से जुड़ी है, जहां चार साल पहले केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत एलसी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को ठेका मिला था। कंपनी ने पानी की टंकी का निर्माण तो कर दिया, लेकिन पाइपलाइन बिछाने का काम आज तक शुरू नहीं हुआ।
नतीजा ये कि टंकी एक शोपीस बनकर रह गई है, और ग्राम सभा के चार गांवों – जोगिया बुज़ुर्ग, परसौना, मिश्री दाड़ी और निबही दाढ़ी – में रहने वाले हजारों लोग अभी भी हैंडपंप या तालाब के दूषित पानी पर निर्भर हैं। स्मार्टख़बरी की टीम गांव पहुंचकर ग्रामीणों से बात की, तो पता चला कि ये समस्या अब स्वास्थ्य संकट बन चुकी है। जलजनित बीमारियां जैसे डायरिया, टाइफाइड और हेपेटाइटिस यहां आम हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में। जनसंख्या अच्छी-खासी होने के बावजूद, कोई घर ऐसा नहीं जहां नल से स्वच्छ जल आता हो।
योजना की शुरुआत और ठेकेदार की लापरवाही
हर घर जल जीवन मिशन की शुरुआत 2019 में हुई थी, जिसका मकसद 2024 तक हर ग्रामीण घर में नल से सुरक्षित पेयजल पहुंचाना था। उत्तर प्रदेश में ये योजना तेजी से चल रही है, जहां अब तक लाखों घरों तक कनेक्शन पहुंच चुके हैं। लेकिन देवरिया जैसे जिलों में कई जगहों पर भ्रष्टाचार और देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
जोगिया बुज़ुर्ग में एलसी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 2021 में ठेका मिला। कंपनी, जो 1994 से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में काम कर रही है और जल जीवन मिशन के कई प्रोजेक्ट्स में शामिल है, ने टंकी तो बना दी, लेकिन आगे का काम ठप। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सोनू दुबे ने मुझे बताया कि उन्होंने कई बार कंपनी से पाइपलाइन बिछाने को कहा, लेकिन जवाब मिला – बजट नहीं है। “हमने सीडीओ और अन्य अधिकारियों को भी अवगत कराया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं,” सोनू ने दुखी होकर कहा।
कंपनी की ओर से हाल ही में लिंक्डइन पर पोस्ट किया गया कि वे यूपी जल जीवन मिशन में सस्टेनेबल वॉटर सप्लाई पर काम कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।
ग्रामीणों का दर्द और स्वास्थ्य पर असर
क्षेत्र पंचायत सदस्य सुमन कन्नौजिया ने कहा, “बरसात में तो हालत और खराब हो जाती है। दूषित पानी से बच्चे बीमार पड़ते हैं, डॉक्टर के चक्कर काटने पड़ते हैं।” ग्रामीण विपिन बिहारी, रामजी यादव, विश्वनाथ हरिजन, विक्रमजीत गौड़, राधे, राम परीछा, महंथ और आशुतोष दुबे जैसे लोगों ने मिलकर मांग की कि पाइपलाइन तुरंत बिछाई जाए।
एक ग्रामीण ने बताया कि हैंडपंप से पीला और गंदा पानी निकलता है, जो सेहत बिगाड़ता है। देवरिया जिले में जल जीवन मिशन के तहत 3.92 लाख घरों तक नल पहुंचाने का दावा है, लेकिन जोगिया बुज़ुर्ग जैसे गांव उपेक्षित हैं। 2022 में ही जिले में केवल 126 ग्राम पंचायतों में काम शुरू हुआ था, और अब 2025 में भी कई जगहों पर देरी बरकरार है।
प्रशासन की भूमिका और भ्रष्टाचार की आशंका
देवरिया जिले में जल जीवन मिशन की प्रगति पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी समीक्षा की थी, जहां उन्होंने बचे काम तेज करने के निर्देश दिए। लेकिन स्थानीय स्तर पर ठेकेदारों की लापरवाही से योजनाएं अटकी हैं। जोगिया बुज़ुर्ग में 2023 में वॉल राइटिंग जैसी IEC एक्टिविटी हुई थी, लेकिन असल काम नहीं। ग्रामीणों का आरोप है कि भ्रष्टाचार की वजह से फंड्स का दुरुपयोग हो रहा है।
समाधान की दिशा में कदम
ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल पाइपलाइन बिछाकर कनेक्शन दिए जाएं। सोनू दुबे कहते हैं, “अगर बजट नहीं तो ठेका क्यों लिया?” प्रशासन को चाहिए कि जांच करे और कंपनी पर कार्रवाई करे। जल जीवन मिशन की सफलता के लिए कम्युनिटी इन्वॉल्वमेंट जरूरी है, जैसे कि गांवों में वॉटर यूजर ग्रुप्स बनाना।