देवरिया (उत्तर प्रदेश), 18 अगस्त |
देवरिया के एक सुनसान प्लॉट में झाड़ियों के बीच दबा वो कंकाल, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। सदर कोतवाली क्षेत्र में मिले मानव कंकाल ने पुलिस से लेकर स्थानीय लोगों तक के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं – कौन था ये शख्स? कैसे हुई मौत? और क्यों लाश यहां दफन रही इतने समय तक?
प्लॉट नंबर 45 में क्या मिला?
सोमनाथ नगर मोहल्ले के जमुना स्थित 2 बीघे के खाली प्लॉट में सोमवार सुबह को स्थानीय सभासद की नजर झाड़ियों के बीच कुछ असामान्य हड्डियों पर पड़ी। जैसे ही उन्होंने करीब से देखा, एक पूरा मानव कंकाल नजर आया। तुरंत कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस टीम ने क्षेत्र को घेराव में ले लिया।
पुलिस-फोरेंसिक की कार्रवाई
क्षेत्राधिकारी नगर संजय कुमार रेड्डी खुद मौके पर पहुंचे। उनकी अगुवाई में तत्काल तीन प्रमुख कदम उठाए गए:
- डॉग स्क्वाड तलाशी: खोजी कुत्तों की मदद से आसपास के इलाके की छानबीन की गई।
- फोरेंसिक टीम का सैंपल कलेक्शन: हड्डियों, आसपास की मिट्टी और संदिग्ध सामग्रियों को साक्ष्य के तौर पर सील किया गया।
- कंकाल को एम्बुलेंस में लादकर पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।
क्या कहता है शुरुआती अंदाजा?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक कंकाल के हालात काफी पुराने लग रहे हैं। फोरेंसिक रिपोर्ट से दो बड़े सवालों के जवाब मिल सकते हैं:
- मौत को कितना वक्त हुआ?
- क्या यह प्राकृतिक मौत थी या हत्या के संकेत हैं?
स्थानीयों की प्रतिक्रिया: डर और सवाल
मोहल्ले के रहने वाले राजेश यादव बताते हैं: “ये प्लॉट सालों से खाली पड़ा था। झाड़ियाँ इतनी घनी थीं कि अंदर क्या है, कोई देख नहीं सकता था। रात में अक्सर शराबी और संदिग्ध लोग यहाँ जमा होते थे।”
पुलिस प्रवक्ता का आधिकारिक बयान
सदर कोतवाली इंचार्ज ने पुष्टि की: “हम फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं। स्थानीय थानों में पुरानी गुमशुदगी रिपोर्ट्स के साथ मैच करने की कोशिश की जा रही है।”
सोमनाथ नगर के उस सूनसान प्लॉट में मिला मानव कंकाल सिर्फ हड्डियों का ढांचा नहीं, बल्कि किसी अनसुलझे दुखांत का सबूत है। पुलिस के जवाब अभी बाकी हैं, लेकिन एक बात साफ है – इस घटना ने पूरे इलाके में सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जब तक इस कंकाल की पहचान और मौत का रहस्य नहीं खुलता, तब तक देवरिया के लोगों के मन में ये सवाल गूंजता रहेगा: “कौन था वो बेचारा जिसकी हड्डियाँ इतने दिनों तक झाड़ियों में भटकती रहीं?”**