पाकिस्तान: संसाधन-समृद्ध खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बढ़ता संघर्ष विकास के लिए खतरा

पाकिस्तान: संसाधन-समृद्ध खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बढ़ता संघर्ष विकास के लिए खतरा


इस्लामाबाद, 10 जनवरी। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (केपी) और बलूचिस्तान प्रांतों में जारी हिंसा देश के संसाधन-आधारित विकास की नींव को कमजोर कर रही है। केपी जहां जलविद्युत, सीमा-पार ऊर्जा गलियारों और उभरते महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों का केंद्र है, वहीं बलूचिस्तान में तांबा-सोना, कोयला और तटीय ऊर्जा अवसंरचना जैसे बड़े पैमाने के संसाधन मौजूद हैं। इसके बावजूद, इन दोनों प्रांतों में लगातार हिंसा बनी हुई है, जिससे विकास और निवेश पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

इस्लामाबाद स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (सीआरएसएस) के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एक ओर अक्टूबर 2025 में डूरंड लाइन पार हमलों में कमी देखी गई, वहीं दूसरी ओर 2025 पाकिस्तान के लिए पिछले एक दशक का सबसे घातक वर्ष साबित हुआ। इस दौरान हिंसा का बड़ा हिस्सा केपी और बलूचिस्तान में केंद्रित रहा।

अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, कुल हिंसा में साल-दर-साल लगभग 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 2024 में जहां 2,555 मौतें हुई थीं, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 3,417 तक पहुंच गया। यह रुझान 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से लगातार पांच वर्षों से जारी है। 2023 में हिंसा में लगभग 56 प्रतिशत, 2024 में करीब 67 प्रतिशत और 2025 में फिर 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो दर्शाता है कि देश एक दीर्घकालिक सुरक्षा संकट के दौर से गुजर रहा है, न कि अस्थायी अस्थिरता से।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों के लिए यह स्थिति गंभीर संकेत है, क्योंकि यह सुरक्षा माहौल में संरचनात्मक गिरावट को दर्शाती है, जिसे केवल जोखिम प्रीमियम या अतिरिक्त सुरक्षा उपायों से आसानी से संभाला नहीं जा सकता।

हिंसा का सबसे अधिक प्रभाव उन्हीं प्रांतों में देखा गया है जो पाकिस्तान की ऊर्जा और खनिज क्षमता की रीढ़ हैं। 2025 में देश भर में हुई कुल मौतों में से 96 प्रतिशत से अधिक और हिंसक घटनाओं के लगभग 93 प्रतिशत मामले केपी और बलूचिस्तान में दर्ज किए गए। केपी सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां मौतों की संख्या 2024 के 1,620 से बढ़कर 2025 में 2,331 हो गई, यानी 44 प्रतिशत की वृद्धि। वहीं बलूचिस्तान में मौतें 787 से बढ़कर 956 हो गईं, जो लगभग 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में हिंसा के मुख्य निशाने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां रहीं। इस दौरान पाकिस्तानी सेना और फ्रंटियर कॉर्प्स के 374 जवान मारे गए, जिनमें 22 अधिकारी शामिल थे, जबकि पुलिस बल में 216 मौतें दर्ज की गईं।

हिंसा के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को बताया गया है। इसके बाद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए), बलूच लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) और आतंकी संगठन दाएश की क्षेत्रीय शाखा का नाम सामने आया है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये वही संगठन हैं जो पहले भी रणनीतिक अवसंरचना, चीनी-समर्थित परियोजनाओं और सरकारी प्रतीकों को निशाना बनाते रहे हैं। भारी संख्या में आतंकियों के मारे जाने के बावजूद इन संगठनों की सक्रियता यह दर्शाती है कि वे आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा बलों से हटकर उच्च-मूल्य वाले आर्थिक ठिकानों को भी निशाना बना सकते हैं, जिससे पाकिस्तान की विकास योजनाओं पर और बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है।
 

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