'द केरल स्टोरी 2' पर फिर छिड़ा सियासी संग्राम! विपक्ष ने लव-जिहाद फिल्म को बैन करने की मांग की तेज

'द केरल स्टोरी 2' को लेकर सियासत तेज, विपक्ष ने की फिल्म को बैन करने की मांग


नई दिल्ली, 20 फरवरी। लव-जिहाद और धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दों पर बनी फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' टीजर रिलीज के साथ ही विवादों में घिर चुकी है। अब फिल्म को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी सियासत तेज हो गई है और फिल्म का विरोध होने के साथ-साथ फिल्म को सत्ताधारी पार्टी का समर्थन भी मिल रहा है।

हालांकि विरोध के बीच फिल्म पर बैन लगाने की मांग भी तेज हो गई है।

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' का खुला समर्थन किया है और फिल्म का विरोध करने वाले लोगों को निशाना भी साधा है। उन्होंने कहा, "आज वही तंत्र, जिसमें कांग्रेस और वामपंथी दल शामिल हैं, जो आमतौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, रचनात्मकता और स्वतंत्र भाषण का समर्थन करने का दावा करते हैं और भाजपा के खिलाफ बनी सभी फिल्मों का समर्थन करते हैं, रचनात्मक आवाजों को दबाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने आगे कहा, 'द केरल स्टोरी' या 'द केरल स्टोरी पार्ट 2' जैसी फिल्म बनने में क्या समस्या है? पहले भाग ने लव जिहाद की सच्चाई को उजागर किया, जिसे चर्च और अदालतों दोनों ने स्वीकार किया है, फिर भी उन्होंने इसका विरोध किया। अब, वे एक ऐसी फिल्म का विरोध कर रहे हैं जो दिखाती है कि कैसे कट्टरपंथी ताकतें जबरन धर्मांतरण का इस्तेमाल करके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं और महिलाओं का शोषण करती हैं। वे इसका समर्थन क्यों नहीं कर रहे हैं? सच्चाई उजागर करने में क्या हर्ज है? वोट बैंक की राजनीति के नाम पर, वामपंथी और कांग्रेस, जो कभी-कभी हमास और जमात के साथ गठबंधन या संबंध बनाए रखते हैं, वोट बैंक के हितों का पक्ष ले रहे हैं, जिससे महिलाओं के अधिकारों को खतरा हो रहा है।

वहीं यूपी के मंत्री नरेंद्र कश्यप का कहना है कि 'द केरल स्टोरी 2' जैसी फिल्में समाज की सच्चाई को सामने लाने का काम करती हैं। उन्होंने कहा, "जबरन धर्म परिवर्तन देश और संविधान दोनों के विरोध में है, और ऐसे में फिल्म का विरोध होना गलत है।"

वहीं दूसरी तरफ फिल्म का विरोध करने वालों की कमी नहीं है। सपा और कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने फिल्मों का कड़ा विरोध किया है और फिल्म पर बैन लगाने की मांग की है।

फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' पर राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला का कहना है कि फिल्म समाज में भेदभाव पैदा करती है। उन्होंने आईएएनएस से कहा, जब भी किसी विपक्षी शासित राज्य में चुनाव होते हैं या कोई बड़ा राष्ट्रीय चुनाव होता है, तो ऐसी फिल्में रिलीज होने लगती हैं। मैं किसी भी फिल्म पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हूं; मेरा मानना है कि देश में हर फिल्म या किताब को बिना किसी प्रतिबंध के अनुमति मिलनी चाहिए। हालांकि, 'द केरल स्टोरी 2' के मामले में, फिल्म निर्माताओं ने खुद भारत के सर्वोच्च न्यायालय और मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ के समक्ष स्वीकार किया कि उन्होंने झूठा दावा किया था कि आईएसआईएस ने 30,000 लड़कियों का अपहरण किया था। इसलिए ऐसी फिल्में देश में भेदभाव पैदा करने का काम करती हैं।"

आंध्र प्रदेश के एपीसीसी उपाध्यक्ष वी. गुरुनाधम ने भी विरोध किया। उनका कहना है कि ऐसी फिल्में विशेष रूप से हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच नफरत को भड़काती हैं। उन्होंने कहा, "द केरल स्टोरी 2" को बनाया ही इस तरह से गया है कि फिल्म दोनों समुदाय के बीच हिंसा और भेदभाव को बढ़ा सकती है। ये फिल्म मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि वोट बैंक की राजनीति के लिए बनी है।

फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' पर कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने फिल्म को बैन करने की मांग की है। उन्होंने कहा, "धर्म या संवेदनशील विषयों से संबंधित इस तरह की कहानियों और फिल्मों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि यह समाज में द्वेष पैदा करती है और समाज को बांटने का काम करती है।"

वहीं, एसपी विधायक संग्राम सिंह का कहना है कि भाजपा अंदर से हिल चुकी है और कितनी भी कोशिश कर ले सांप्रदायिक माहौल देने की, लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसा कुछ नहीं होगा।
 
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