रांची 19 फरवरी। विधानसभा में राज्यपाल के धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आप सब लोगों ने देखा होगा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर नेताओं का भाषण हुआ। इस दौरान राज्यपाल के अभिभाषण को छोड़कर लोग यहां-वहां भटक रहे थे।
उन्होंने कहा कि झारखंड की बुनियादी समस्याओं को छूने तक से लोग डर रहे थे, बोलने तक से लोग डर रहे थे। पीएम मोदी और वंदे मातरम को लेकर उन्होंने कहा कि एक दिन अलग से विधानसभा बुला लीजिए, बढ़िया से बहस कर लिया जाएगा।
झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण है, झारखंड की जनता झारखंड की विधानसभा की ओर देख रही है। विधानसभा में यहां के लोगों के लिए क्या बात कर रहे हैं? लोग क्या चर्चा कर रहे हैं? इसलिए सदन में भी मैंने इसी बात को कहा कि झारखंड राज्य बना क्यों? उन्होंने कहा कि इस राज्य को बनाने के लिए अनेकों लोगों ने कुर्बानी दी। हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों के राज में भी जल, जंगल और जमीन के लिए लड़ाई लड़ी है। सभी क्षेत्र से लोग लड़ रहे थे, जमीन के लिए लोग लड़ रहे थे, अपनी भूमि के लिए लोग लड़ रहे थे।
उन्होंने कहा कि सरकार ने कभी उन्हें खदान के नाम पर, कारखाने के नाम पर विस्थापित किया, न्याय नहीं दिया, लेकिन आज झारखंड बनने के बाद भी हमारे लोगों को उजाड़ा जा रहा है। आज भी कोई जसीडीह में जाकर देखे किस प्रकार से महिलाएं रो रही हैं। उन्हें पीटा जा रहा है। लोगों के खेतों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है, और सरकार कहती है कि 1974 में एक्वायर हुआ था। उन्होंने कहा कि झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार ही खेतों से बने हुए घरों से लोगों को उजाड़ रही है। बुलडोजर चला रहे हैं, महिलाओं को मार रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उद्योगों और अस्पतालों के लिए बंजर भूमि पड़ी हुई है। नए सिरे से सरकार को चिह्नित करना चाहिए। वहां, उद्योग लगाना चाहिए और अस्पताल बनना चाहिए। कोई रोक नहीं है, लेकिन जिस जमीन को जिनके पूर्वजों ने खून-पसीना बहाकर खेत बनाया है, उसे आपलोग उजाड़ रहे हो। इस पर आपलोग चर्चा नहीं कर रहे हो, इस पर कुछ बोल नहीं रहे हो। उन्होंने कहा कि हमने कहा, 'आप जाकर रोकिए।' मैंने विधानसभा अध्यक्ष से भी निवेदन किया है कि जरूरत है तो कमेटी बनाकर विधायक जाएं। सभी जगहों पर टीम देखे। नहीं तो मैं तो जाऊंगा ही।