असम में फिर उलझी विपक्षी एकता की गुत्थी! क्षेत्रीय दलों ने की बैठक, कांग्रेस को रखा बाहर; सस्पेंस बरकरार

असम में विपक्षी एकता पर फिर सस्पेंस, क्षेत्रीय दलों की बैठक में कांग्रेस नदारद


गुवाहाटी, 19 फरवरी। असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता के प्रयासों पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। गुरुवार को दो प्रमुख क्षेत्रीय दल रायजोर दल और असम जातीय परिषद ने गुवाहाटी में बंद कमरे में बैठक की, जिसमें सीट-बंटवारे को लेकर चर्चा हुई। इस बैठक में कांग्रेस को शामिल नहीं किया गया।

बैठक में राइजर दल के प्रमुख और विधायक अखिल गोगोई, एजेपी के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई और दोनों दलों के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके अलावा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया। इससे संकेत मिलता है कि गैर-कांग्रेसी विपक्षी दल व्यापक समन्वय की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा सीट-बंटवारे और विपक्षी एकता की आगे की रणनीति तय करना था। यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद विपक्षी खेमे में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में अखिल गोगोई ने कांग्रेस को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए सीट-बंटवारे पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस विपक्षी एकता को लेकर गंभीर है, तो उसे अगले दो दिनों के भीतर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

उन्होंने कहा, “अगर कांग्रेस स्पष्ट रुख नहीं अपनाती है, तो हम अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कर सकते।”

गोगोई ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी जरूरत पड़ने पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “राइजर दल 46 विधानसभा सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।”

हालांकि, बैठक में मौजूद नेताओं ने यह भी कहा कि व्यापक विपक्षी एकता के लिए दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। कांग्रेस की प्रतिक्रिया के आधार पर आगे और बातचीत हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक से कांग्रेस को अलग रखना विपक्षी दलों के बीच बढ़ते अविश्वास को दर्शाता है, खासकर राज्य कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बाद।

इधर, सत्तारूढ़ भाजपा पहले ही चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है। ऐसे में विपक्ष के भीतर सीट-बंटवारे और नेतृत्व को लेकर स्पष्टता का अभाव उनके चुनावी प्रदर्शन पर असर डाल सकता है।

आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि असम में एकजुट विपक्षी मोर्चा बन पाता है या दल अलग-अलग चुनावी मैदान में उतरते हैं।
 

Similar threads

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
8,573
Messages
8,605
Members
19
Latest member
Jessantict5434
Back
Top