इस्लामाबाद, 19 फरवरी। पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बाजौर जिले में हुए हालिया आतंकी हमले को लेकर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को डिमार्शे (औपचारिक विरोध पत्र) जारी किया है। पाकिस्तान का आरोप है कि इस हमले के लिए अफगान जमीन का इस्तेमाल किया गया।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय (पीएफओ) ने अफगान मिशन के उप प्रमुख को तलब कर यह डिमार्शे सौंपा। बयान में कहा गया कि पाकिस्तान ने बाजौर में सैन्य और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की चौकियों पर वाहन-जनित आत्मघाती हमले और उसके बाद हुई गोलीबारी की कड़ी निंदा की है। इस हमले को ‘फितना अल खवारिज’ यानी प्रतिबंधित संगठन टीटीपी से जुड़ा बताया गया है।
पाकिस्तान का कहना है कि टीटीपी नेतृत्व अफगानिस्तान में मौजूद है और वहां से बिना रोक-टोक गतिविधियां चला रहा है। पाकिस्तान ने दावा किया कि अफगानिस्तान ने पहले भी आश्वासन दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस या दिखाई देने वाली कार्रवाई नहीं की गई।
पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के अनुसार, सोमवार को बाजौर में एक चेकपोस्ट पर विस्फोटकों से भरे वाहन से हमला किया गया, जिसमें 11 सुरक्षाकर्मी मारे गए। जवाबी कार्रवाई में 12 आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया।
इससे पहले, इसी महीने अफगानिस्तान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने 6 फरवरी को इस्लामाबाद की एक मस्जिद पर हुए हमले के संबंध में पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें “गैर-जिम्मेदाराना और निराधार” बताया था। यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर कहा था कि शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि हमलावर अफगानिस्तान से आवाजाही कर रहा था।
अफगान राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने कहा कि बिना पूरी जांच के तुरंत अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराना गैर-जिम्मेदाराना रवैया है। मंत्रालय ने कहा कि बलूचिस्तान समेत अन्य घटनाओं में भी पहले ऐसा पैटर्न देखा गया है। बयान में कहा गया कि ऐसे हमलों को अफगानिस्तान से जोड़ने का “कोई तर्क या आधार नहीं” है और इससे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा विफलताओं को छिपाया नहीं जा सकता।
अफगान मंत्रालय ने यह भी सवाल उठाया कि यदि हमलावरों की पहचान इतनी जल्दी हो गई थी, तो पहले ही हमले को रोका क्यों नहीं गया। साथ ही उसने कहा कि इस्लामी मूल्यों के तहत निर्दोष नागरिकों को नुकसान पहुंचाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा खामियों की जिम्मेदारी लेते हुए नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए।