संजय निषाद का अखिलेश पर तंज: 'पीडीए' नहीं, सपाई तो 'पीड़ा, दुख, अपमान' देते हैं, अपनों ने ही लूटा

पीडीए के नाम पर पीड़ित, दुखी और अपमानित करते हैं सपाईः मंत्री संजय निषाद


लखनऊ, 19 फरवरी। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने सपा मुखिया अखिलेश यादव को लेकर तंज कसा है। यूपी विधानसभा में बजट सत्र में चर्चा के दौरान बुधवार को समाजवादी पार्टी के विधायकों द्वारा हंगामा किए जाने और भाषण के कागज छीने जाने पर संजय निषाद ने कहा कि "हमें अपनों ने लूटा, गैरों में कहा दम था, किश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था।"

मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने आईएएनएस से बातचीत में कहा," 30 साल ये लोग सत्ता में रहे और बदले में लूट लिया। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में इनका चाल, चरित्र और चेहरा सामने आ गया। ये नाम का पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक (पीडीए) कहते हैं। ये पीडीए के नाम पर पीड़ा, दुख और अपमानित करते हैं। हमारी आवाज बंद करते हैं। हम तो सच्चाई बोलेंगे कि 30 साल में निषादों के लिए 1 रुपया भी दिया हो तो बताओ। दिल्ली से जो पैसा आता था, वो भी खा लिया। जनता को सच्चाई तो बतानी पड़ेगी कि बंदूक के बल पर कैसे पैसे छीनते थे।"

संजय निषाद ने आगे कहा, "हमारे नेता सब मारे गए, हम तो बताएंगे। हमें सुरक्षा चाहिए, हमें भी मरवा डालेंगे ये लोग। सपा कार्यकाल में हमारे नेता मारे गए तो क्यों नहीं सीबीआई जांच करवाई? जब आजम खां की भैंस खोजी जा सकती है, तो हमारे नेताओं के हत्यारे क्यों नहीं खोजे जा सकते। सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट बताती है कि 27 में मिल्क मैन, 23 में लेदर मैन तो अदर मैन कहां चला गया। ये हिस्सा खाने वाले लोग हैं, मछुआरों को खाने वाले मगरमच्छ हैं। मेरा नाम एससी में है। राष्ट्रपति के नोटिफिकेशन में है तो 1994 में निषादों को ओबीसी में डालने की क्या जरूरत थी।"

संजय निषाद ने कहा कि ये लोग चालाक हैं। इसलिए ऐसा नाम रखा है, जिससे विवाद हो जाए और बाद में जब प्रचार हो जाएगा तो नाम बदल देंगे। मैं तो चाहता हूं कि किसी जाति, धर्म के नाम पर विवादित फिल्म नाम न बने। फिल्म का टाइटल पहले डिसाइड हो जाना चाहिए, इसके बाद फिल्म बने। इसे रोकने के लिए कानून बनना चाहिए।

अरशद मदनी के कयामत तक मुस्लिमों को कोई नहीं रोकने वाले बयान पर संजय निषाद ने कहा कि "इनके ठेकेदारी में मुसलमान आज जाहिल बनकर बेकार घूम रहा है। मुस्लिम समाज के लोग इसी देश के नागरिक हैं और हमारे भाई हैं, लेकिन इन बेईमानों की वजह से बर्बाद हैं। भारत में मुसलमान जातियों में बंटा है।" संजय निषाद ने आगे कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संत हैं, उन्हें राजनीति से दूर रहना चाहिए और धर्म का प्रचार करना चाहिए।
 

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