एर्नाकुलम, 19 फरवरी। एर्नाकुलम की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने पॉपुलर ग्रुप ऑफ कंपनीज के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 10 फरवरी 2026 के अपने आदेश के माध्यम से प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत अटैच की गई कुल 65.07 करोड़ रुपए की संपत्तियों को बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स एक्ट (बीयूडीएस एक्ट), 2019 के तहत सक्षम अथॉरिटी को वापस सौंपने का आदेश दिया है।
एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने इन संपत्तियों को 17 सितंबर 2021 और 29 दिसंबर 2021 के प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के जरिए कुर्क किया था, जिसकी पुष्टि एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने की थी। ये कुर्की ईसीआईआर नंबर केसीजेडओ/32/2020 (दिनांक 17.09.2020) के संबंध में की गई थी, जो आईपीसी की धाराओं 120बी, 420, 406, 409, 471 और बीयूडीएस एक्ट, 2019 के प्रावधानों के तहत अनुसूचित अपराधों पर आधारित थी।
इस मामले में पॉपुलर ग्रुप ऑफ कंपनीज और उसके प्रमोटरों/निदेशकों/भागीदारों, थॉमस डैनियल, प्रभा थॉमस, रिनू मरियम थॉमस, रीबा मैरी थॉमस, रिया एन थॉमस और अन्य, पर जमाकर्ताओं के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप है। कंपनी ने अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम चलाकर हजारों निवेशकों को ठगा था, जिसकी राशि सैकड़ों करोड़ रुपये बताई जाती है। ईडी ने 2021 में थॉमस डैनियल और उनकी बेटी रिनू मरियम थॉमस को गिरफ्तार किया था। पीएमएलए की धारा 44/45 के तहत अभियोजन शिकायत 30 अप्रैल 2022 (एससी संख्या 392/2022) और पूरक शिकायत 31 जुलाई 2023 को दर्ज की गई थी।
बीयूडीएस एक्ट के तहत सक्षम अथॉरिटी ने केरल हाई कोर्ट के 17 दिसंबर 2024 के डब्ल्यूपी(सी) नंबर 22221/2024 में दिए निर्देशों के बाद पीएमएलए की धारा 8(8) के तहत स्पेशल कोर्ट में याचिका दायर की। ईडी ने इस रिक्वेस्ट पर कोई आपत्ति नहीं जताई, ताकि असली जमाकर्ताओं/पीड़ितों को जल्द मुआवजा मिल सके।
स्पेशल कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए कहा कि दोनों कानूनों के तहत प्रभावित जमाकर्ता एक ही हैं, इसलिए उनके हितों की रक्षा जरूरी है। यह ट्रांसफर बीयूडीएस अथॉरिटी को संपत्तियों का सही मूल्यांकन और वितरण करने में मदद करेगा। आरोपी पक्ष द्वारा उठाई गई आपत्तियों को बीयूडीएस अथॉरिटी के सामने फैसले के लिए खुला रखा गया है। अब ये संपत्तियां केरल सरकार की सक्षम अथॉरिटी (होम डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी, जिनका प्रतिनिधित्व एर्नाकुलम के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर करेंगे) को सौंप दी जाएंगी, जहां बीयूडीएस एक्ट के तहत आगे की कार्रवाई होगी।