'कश्मीर-नेटिविटी रीगेन्ड' विमोचन पर बोले एलजी मनोज सिन्हा: जम्मू-कश्मीर में गहन परिवर्तन, पंडितों की वापसी PM की मजबूत प्रतिबद्धता

'कश्मीर-नेटिविटी रीगेन्ड' पुस्तक के विमोचन समारोह में बोले एलजी मनोज सिन्हा, 'गहन परिवर्तन से गुजर रहा जम्मू-कश्मीर'


जम्मू, 19 फरवरी। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत प्रतिबद्धता बताया। उन्होंने कहा कि यह वादा पूरा करने के लिए केंद्र और प्रशासन प्रतिबद्ध हैं।

उपराज्यपाल प्रो. अशोक कौल की किताब 'कश्मीर-नेटिविटी रीगेन्ड' के विमोचन समारोह में बोल रहे थे, जो जम्मू विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ। किताब कश्मीरी पंडितों के 1989-90 के पलायन की दर्दनाक कहानी बयान करती है। यह उन अंधेरे दिनों के आतंक, डर और पुरखों की जड़ों से उखड़ने की स्थायी तबाही को उजागर करती है।

मनोज सिन्हा ने कहा, "जम्मू-कश्मीर 2019 से गहन परिवर्तन से गुजर रहा है। दुश्मन की साजिश, जो यूट्यूब के लोगों के सपनों और किस्मत को बर्बाद करना चाहती थी, उसे निर्णायक रूप से कुचल दिया गया है। अथक प्रयासों से इस धरती की प्राचीन शान बहाल की गई है और विकास को गति दी गई है। बहुत जल्द यह भूमि आतंकवाद के अभिशाप से पूरी तरह मुक्त हो जाएगी।"

उन्होंने प्रो. कौल की किताब की सराहना की और कहा कि यह दशकों से चुप्पी में दबी सच्चाई को तोड़ने की सराहनीय कोशिश है। उपराज्यपाल ने कश्मीरी पंडित समुदाय के अदम्य साहस को सलाम किया। उन्होंने कहा कि हर विस्थापित परिवार ने अपने अंदर कश्मीर की जीवंत चिंगारी संजोकर रखी। संघर्ष और कष्टों के बावजूद उन्होंने अपनी सोच, आध्यात्मिकता, संस्कृति, भाषा और परंपराओं को जीवित रखा। मुश्किलों में भी उन्होंने अवसर तलाशे और सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ।

सिन्हा ने याद दिलाया कि 2021 में कश्मीरी माइग्रेंट वेब पोर्टल लॉन्च किया गया था ताकि आतंकवादियों द्वारा कब्जा की गई कश्मीरी पंडितों की जमीनों और घरों को वापस दिलाया जा सके। उन्होंने कहा, "दुनिया के सबसे बड़े दुखों में से एक है अपनी ही जमीन पर अजनबी बन जाना। 1989-90 में आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का दर्द इतना गहरा है कि समय का मरहम भी इसे कम नहीं कर पाया। रातोंरात घर छोड़ने और जड़ों से उजड़ने का कष्ट आज भी परिवारों की रगों में कांटों की तरह चुभता है।"

उपराज्यपाल ने आतंक के इकोसिस्टम पर निशाना साधा और कहा कि सच्चाई को दबाने की कोशिश की गई, लेकिन हम उन आतंकवादियों और उनके समर्थकों को कभी नहीं भूलेंगे और न माफ करेंगे, जिन्होंने आतंक फैलाया और पीढ़ियों की आत्माओं पर हमला किया। उन्होंने जोर दिया कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने हजारों निर्दोष कश्मीरी मुसलमानों का भी खून बहाया। कई घटनाएं इतनी दिल दहला देने वाली हैं कि उन्हें दोहराते वक्त शब्द लड़खड़ा जाते हैं। पिछले साल से प्रभावित परिवारों को न्याय मिलना शुरू हो गया है और उनकी रोजगार व अन्य जरूरतों पर काम हो रहा है।

अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीरी पंडितों की युवा पीढ़ी में नया विश्वास जगा कि वे बिना डर के अपनी जड़ों को वापस पा सकते हैं। सिन्हा ने कहा कि प्रो. कौल की किताब समुदाय की मजबूती की दिल छू लेने वाली याद दिलाती है। यह पुनर्निर्माण का दौर है और कश्मीरी पंडित जम्मू-कश्मीर की कहानी के केंद्र में हैं।

समारोह में जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमेश राय, पब्लिशर राजीव झा, अन्य प्रोफेसर, साहित्यकार, छात्र और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
 

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