अयोध्या, 19 फरवरी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 'घर वापसी' और जनसंख्या संबंधी बयानों पर प्रतिक्रिया दी थी। मदनी के बयानों पर महंतों ने नाराजगी जताई और इसे निंदनीय बताया। उन्होंने मदनी के बयान को राजनीतिक साजिश और अशांति फैलाने वाला बताया।
महंत देवेशाचार्य जी महाराज ने मदनी के बयान को मूर्खतापूर्ण बताते हुए कहा, "मोहन भागवत ने किसी खास व्यक्ति या फिर समुदाय पर जोर-जबरदस्ती नहीं की, बल्कि जो अपनी मर्जी से आना चाहते हैं, उनका स्वागत किया है। मुसलमानों का कोई पुराना इतिहास तो है नहीं कि वे जबरन हिंदू बनाए जाएंगे, लेकिन जिनकी इच्छा है, उनका सम्मान के साथ स्वागत किया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि मदनी राजनीति के चक्कर में ऐसे बयान दे रहे हैं, जो दुखद और निंदनीय है। ऐसे बयान शांति के बजाय अशांति फैलाते हैं।
वहीं, सीताराम दास ने मदनी के बयान को निंदनीय और घृणित मानसिकता वाला बताया। उन्होंने कहा, "आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जैसे राष्ट्रवादी नेताओं पर ऐसे बयान देना बहुत गलत है। मैं मदनी से पूछता हूं कि वे खुद को होश में कैसे लाते हैं, क्योंकि उनकी सोच जिहादी प्रवृत्ति वाली है। अगर ऐसे लोग राष्ट्रवादी नेताओं पर उंगली उठाएंगे तो भारतीय भी जवाब देंगे।"
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे लोग पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं, जबकि भारत में रहते हैं। आरएसएस देश की एकता और सेवा के लिए समर्पित है। ऐसे महापुरुषों पर हमला करना नीचता है। उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा, "मैं पूछना चाहूंगा कि क्या मदनी के पास हिंदुओं की सातवीं पीढ़ी भी होगी? अरे, आपके इस्लामी देशों की मस्जिदों में फिर भी धमाके होते हैं, लेकिन भारत में मुसलमान खुशी से रहते हैं। हिंदू आबादी घट रही है।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा, "मदनी अब बूढ़े हो चुके हैं और पुरानी बातें वे भूल चुके हैं। 16 अगस्त 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे पर कई निर्दोष हिंदुओं की हत्या हुई, क्योंकि मुसलमान हिंदुओं के साथ नहीं रहना चाहते थे। वहीं, 1990 में कश्मीर में भी हिंदुओं की हत्या और महिलाओं पर अत्याचार हुए, मस्जिदों से फरमान जारी किए गए।"
उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि मदनी के कयामत के दिन चल रहे हैं और दफन होने का समय आ गया है। देशवासियों को समझना होगा कि मानवता बचानी है तो मदनी जैसे मानवता विरोधी विचारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।