झारखंड में हाथियों के कहर से मौतें! विधानसभा की सीढ़ियों पर विधायक का धरना, सरकार पर लापरवाही का गंभीर आरोप

झारखंड विधानसभा परिसर में गूंजा हाथियों के बढ़ते हमलों का मुद्दा, विधायक ने सदन की सीढ़ियों पर दिया धरना


रांची, 19 फरवरी। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन जंगली हाथियों के हमले में लगातार हो रही मौतों को लेकर सदन परिसर में राजनीतिक तापमान बढ़ गया।

हाल के दिनों में हाथियों के हमले में 10 से भी ज्यादा लोगों की मौत के बाद मांडू विधायक निर्मल महतो ने विधानसभा परिसर की सीढ़ियों पर बैनर के साथ धरना-प्रदर्शन किया और राज्य सरकार तथा वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।

विधायक ने कहा कि राज्य में हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है, लेकिन वन विभाग उनकी गतिविधियों की प्रभावी मॉनिटरिंग करने में विफल रहा है। उनका आरोप था कि कई-कई दिनों तक हाथियों की लोकेशन का पता नहीं चलता और वे अचानक गांवों व शहरी इलाकों में प्रवेश कर जान-माल का नुकसान पहुंचा रहे हैं।

उन्होंने इसे प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम बताया। प्रदर्शन के दौरान विधायक ने खनन क्षेत्रों में अवैध कोयला और लोहा चोरी के साथ-साथ रात में होने वाली ब्लास्टिंग पर भी सवाल उठाए।

उनका कहना था कि इन गतिविधियों से हाथियों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है, जिससे वे जंगल छोड़कर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि “जल-जंगल-जमीन” की सुरक्षा का दावा करने वाली सरकार प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा में असफल रही है। मृतकों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई। वर्तमान में चार लाख रुपए की सहायता राशि को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर 20 से 30 लाख रुपए करने की मांग की गई।

साथ ही पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग उठाई गई। क्षतिग्रस्त घरों के मामलों में भी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया गया।

विधायक ने कहा कि पूर्ण पुनर्वास के बजाय नाममात्र की सहायता दी जा रही है, जो प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय है। उन्होंने सरकार से क्षतिग्रस्त घरों का पूर्ण पुनर्निर्माण सुनिश्चित करने और हाथी-मानव संघर्ष पर ठोस नीति बनाने की मांग की।
 

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