‘गगनयान’ की तैयारियों में बड़ी सफलता, ड्रोग पैराशूट का सफल लोड टेस्ट

‘गगनयान’ की तैयारियों में बड़ी सफलता, ड्रोग पैराशूट का सफल लोड टेस्ट


नई दिल्ली, 19 फरवरी। भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियों को एक बड़ी सफलता मिली है। डीआरडीओ ने गगनयान कार्यक्रम के लिए ड्रोग पैराशूट का सफल क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट पूरा किया है। यह परीक्षण चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज सुविधा में किया गया।

बता दें कि गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है। इसे इसरो द्वारा पूरा किया जा रहा है। इस मिशन के अंतर्गत 3 सदस्यीय भारतीय दल को 400 किमी की निचली पृथ्वी कक्षा में 3 दिनों के लिए भेजने और फिर उन्हें सुरक्षित वापस लाने की योजना है।

दरअसल, ड्रोग पैराशूट अंतरिक्ष कैप्सूल की सुरक्षित वापसी में अहम भूमिका निभाता है। यह पहले खुलकर कैप्सूल की गति कम करता है और उसे स्थिर करता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि मुख्य पैराशूट सुरक्षित तरीके से खुल सके। इस बार इसे वास्तविक उड़ान में आने वाले अधिकतम भार से भी अधिक दबाव में परखा गया, जिससे इसकी अतिरिक्त सुरक्षा क्षमता सिद्ध हुई। यानी इस बार जो टेस्ट किया गया, उसमें पैराशूट को असली उड़ान से भी ज्यादा दबाव वाली स्थिति में परखा गया।

ऐसे में अगर असली मिशन में हालात मुश्किल भी हों, तब भी यह पैराशूट सुरक्षित काम करेगा। यही कारण है कि डिजाइन में अतिरिक्त सुरक्षा रखी गई है। इस सफलता के बाद भारत ने साबित कर दिया है कि वह हाई-टेक और मजबूत पैराशूट खुद डिजाइन और बना सकता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों और संबंधित संस्थानों को बधाई दी है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। वहीं डिपार्टमेंट ऑफ डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट के सचिव तथा डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफलता पर टीमों को शुभकामनाएं दीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि गगनयान मिशन की तैयारियों को और मजबूत बनाती है व भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान योजना के लिए अहम कदम मानी जा रही है। इस सफलता के साथ भारत ने उच्च क्षमता वाले रिबन पैराशूट के स्वदेशी डिजाइन और निर्माण में अपनी तकनीकी दक्षता सिद्ध की है। यह उपलब्धि अंतरिक्ष तथा रक्षा कार्यक्रमों के लिए उन्नत परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने में टीबीआरएल के योगदान को भी रेखांकित करती है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस परीक्षण में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट तथा टीबीआरएल की विशेषज्ञ टीमों ने भाग लिया।
 
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