कोलकाता, 18 फरवरी। पश्चिम बंगाल के राढ़ क्षेत्र की वह 'लाल माटी', जहां कभी मल्ला राजाओं के घोड़ों की टापें गूंजती थीं और जहां के टेराकोटा (मिट्टी के शिल्प) मंदिरों की नक्काशी आज भी दुनिया को सम्मोहित करती है, वहीं आज सियासी नक्काशी हो रही है। बांकुड़ा विधानसभा सीट (नंबर 252) एक चुनावी क्षेत्र है, जहां जीत के करीब पहुंचकर भी पार्टियां अक्सर जीत नहीं पाती हैं।
बांकुड़ा को 'टैंक सिटी' (तालाबों का शहर) कहा जाता है। 1951 में बनी इस सीट का मिजाज हमेशा से ही 'बेचैन' रहा है। इसने कभी किसी को स्थायी सुकून नहीं दिया। हिंदू महासभा से शुरुआत करने वाले इस क्षेत्र ने वामपंथ के 34 सालों के 'अभेद्य किले' को भी ढहते देखा और तृणमूल के 'परिवर्तन' को भी परखा, लेकिन यहां का मतदाता किसी का 'बंधुआ' नहीं है। 2016 में जब पूरे राज्य में ममता की लहर थी, बांकुड़ा ने कांग्रेस को चुनकर सबको चौंका दिया था। फिर 2021 में इसने भगवा रंग ओढ़ा, मगर जीत का अंतर बहुत कम था।
2021 का चुनाव किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। एक तरफ भाजपा के नीलाद्री शेखर दाना थे, तो दूसरी तरफ तृणमूल की ग्लैमरस स्टार सायंतिका बनर्जी। मुकाबला इतना कड़ा था कि नीलाद्री दाना मात्र 1,468 वोटों से जीते। सायंतिका बनर्जी बाद में हुए उपचुनाव में बारानगर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कर विधायक बनीं।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव ने एक नया अध्याय लिखा। बांकुड़ा संसदीय सीट, जिसके अंतर्गत यह विधानसभा आती है, पर तृणमूल कांग्रेस के अरूप चक्रवर्ती ने भाजपा के तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री सुभाष सरकार को पराजित किया।
बांकुड़ा की राजनीति का असली रिमोट कंट्रोल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के हाथ में है। एससी की (बाउरी, बगड़ी समुदाय) लगभग 32-35 प्रतिशत आबादी है। यहां पर लगभग 8 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है।
बांकुड़ा को मुख्य रूप से यहां की मिट्टी में लेटराइट और आयरन ऑक्साइड (लोहे के अंश) की प्रचुरता के कारण 'लाल माटी' कहा जाता है। बांकुड़ा विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के मध्य में स्थित है।
बांकुड़ा की उत्तरी सीमा दामोदर नदी से घिरी है, जबकि द्वारकेश्वर, शिलाबती, कंगसाबती, गंधेश्वरी और कुमारी नदियां इसके क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। यहां की अर्थव्यवस्था कृषि, लघु उद्योगों और सेवाओं का संगम है। धान प्रमुख फसल है, लेकिन किसान तिलहन, आलू और दालें भी उगाते हैं।
सांस्कृतिक रूप से यह जिला टेराकोटा के प्रसिद्ध 'बांकुड़ा घोड़े', डोकरा धातु शिल्प और हथकरघा के लिए विख्यात है। इसके अलावा, यह शहर एक प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में कार्य करता है, जहां सरकारी कार्यालय, कॉलेज और अस्पताल जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
परिवहन के लिहाज से बांकुड़ा सड़क और रेल मार्गों से सुगम तरीके से जुड़ा है। यह बांकुड़ा-मसाग्राम रेल लाइन पर स्थित है। आद्रा और खड़गपुर के रास्ते यह दक्षिण-पूर्वी रेलवे नेटवर्क का हिस्सा है, जिससे हावड़ा और अन्य प्रमुख जंक्शनों तक सीधी पहुंच सुनिश्चित होती है।