‘द केरल फाइल्स 2’ पर अबू आजमी बोले, अब पानी सिर के ऊपर चला गया है

‘द केरल फाइल्स 2’ पर अबू आजमी बोले, अब पानी सिर के ऊपर चला गया है


मुंबई, 18 फरवरी। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के प्लेन क्रैश मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। इस पर महाराष्ट्र से समाजवादी पार्टी (सपा) नेता अबू आजमी ने कहा कि बाहर की एजेंसी से जांच जरूर होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सभी के सामने आ सके। उन्होंने ‘द केरल फाइल्स 2’ फिल्म पर भी अपनी नाराजगी जताई।

मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में सपा नेता अबू आजमी ने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद लोगों में तरह-तरह के सवाल हैं, उनके जवाब तलाशने होंगे, इसीलिए सीबीआई जांच की मांग की जा रही है। मैं कहता हूं कि बाहर की एजेंसी से पूरे मामले की जांच हो, जिससे सच्चाई सभी के सामने आ पाए।

तेलंगाना सरकार द्वारा रमजान के महीने में मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों को खास छूट दिए जाने पर अबू आजमी ने कहा कि जब तेलंगाना सरकार राहत दे सकती है तो मैं चाहूंगा कि महाराष्ट्र सरकार भी तेलंगाना सरकार से कुछ सीखे।

संघ प्रमुख मोहन भागवत के तीन बच्चे और घुसपैठ वाले बयान पर अबू आजमी ने कहा कि तीन बच्चे ही क्यों, 30 बच्चे पैदा करो, कौन रोक रहा है? जहां तक बात घुसपैठियों की है, तो वह कहां से आते हैं? 2014 से भाजपा की सरकार है। अगर घुसपैठिए आ रहे हैं तो यह किसकी जवाबदेही बनती है? जिनके राज्य में घुसपैठिए आ रहे हैं तो उन्हें जरूर जवाब देना चाहिए। जो घुसपैठिए हैं, उन्हें पकड़ना चाहिए और देश से बाहर करना चाहिए।

‘द केरल फाइल्स 2’ को लेकर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मुसलमानों को तकलीफ देने की बात है। देश संविधान से चलना चाहिए। यह जो मनमानी चल रही हैं न, पानी सिर के ऊपर चला गया है।

मुसलमानों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण खत्म करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर अबू आसिम आजमी ने कहा कि यह एक नफरत भरी और कम्युनल सरकार है, जो रोज रिसर्च करती है कि बहुसंख्यक के ध्रुवीकरण के लिए कौन से मुद्दे उठाए जाएं। 2014 में कांग्रेस और राष्ट्रवादी पार्टी की सरकार ने नौकरी और एजुकेशन में मुसलमानों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण का ऐलान किया था, लेकिन गवर्नमेंट रेज़ोल्यूशन (जीआर) को ठीक से लागू नहीं किया गया। अगर वे सच में चाहते, तो वे जीआर जारी कर सकते थे।

उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के न्याय की बात हो, तो कांग्रेस और भाजपा में कोई फर्क नजर नहीं आता। जो आरक्षण मुसलमानों को कभी दिया ही नहीं गया, उसे सिर्फ ध्रुवीकरण के लिए रद्द करने की घोषणा करने के बजाय सरकार को न्याय करना चाहिए। महाराष्ट्र में मुस्लिम समाज के अंदर कई ऐसे पारंपरिक पेशों से जुड़े तबके हैं जो आर्थिक, शैक्षणिक और समाजी तौर पर बहुत पिछड़े हुए हैं।
 

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