सैन्य सहयोग के नए आयाम, भारत-कंबोडिया के शीर्ष अधिकारियों ने भविष्य की रणनीति पर की गहन चर्चा

सैन्य संबंधों में मजबूती, भारत-कंबोडिया के सैन्य अधिकारियों की मुलाकात


नई दिल्ली, 18 फरवरी। भारत और कंबोडिया के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। कंबोडिया की राजधानी फ्नोम पेन्ह में दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच उच्चस्तरीय मुलाकात हुई। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों की यह मुलाकात आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता के दौरान हुई। वहीं, इन वार्ताओं के इतर मेजर जनरल आकाश जौहर, अतिरिक्त महानिदेशक (अंतरराष्ट्रीय सहयोग), ने रॉयल कंबोडियन आर्मी के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल माओ सोफान से शिष्टाचार भेंट की।

इस मुलाकात में भारत और कंबोडिया के बीच सैन्य संबंधों को और व्यापक तथा प्रभावी बनाने पर गहन चर्चा हुई। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने संयुक्त सैन्य अभ्यासों को बढ़ाने, प्रशिक्षण सहयोग का दायरा विस्तारित करने और रक्षा क्षेत्र में आपसी तालमेल को और मजबूत करने पर जोर दिया। खासतौर पर सैन्य क्षमता निर्माण, पेशेवर सैन्य शिक्षा और अनुभवों के आदान-प्रदान को सहयोग का प्रमुख आधार माना गया।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की ओर से यह हर बार स्पष्ट किया गया है कि वह मित्र देशों के साथ रक्षा साझेदारी को केवल औपचारिक वार्ताओं तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि उसे जमीनी स्तर पर क्रियान्वित सहयोग में बदलना चाहता है। वहीं, कंबोडिया ने भारतीय सशस्त्र बलों के प्रशिक्षण और पेशेवर दक्षता की सराहना की है। कंबोडिया भविष्य में अधिक सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण और विशेषज्ञता कार्यक्रमों के लिए भारत भेजने की इच्छा रखता है।

दोनों देशों ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रक्षा संबंधों को दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत और कंबोडिया के बीच यह बढ़ता सैन्य सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई दे रहा है, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन और सहयोग की भावना को भी मजबूत कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित सैन्य संवाद, संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रम दोनों देशों की सेनाओं को आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक सक्षम बनाएंगे। फ्नोम पेन्ह में हुई यह मुलाकात भारत-कंबोडिया रक्षा संबंधों में एक सकारात्मक और दूरगामी संकेत के रूप में देखी जा रही है, जो आने वाले समय में और व्यापक रणनीतिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
 
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