वैष्णो देवी के पास शंकराचार्य महापरियोजना की आधारशिला रखी, एलजी सिन्हा बोले- खत्म हुआ पीढ़ियों का इंतजार

जम्मू कश्मीर : उपराज्यपाल मनोज सिंहा ने रखी शंकराचार्य परियोजना की आधारशिला


जम्मू, 18 फरवरी। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को शंकराचार्य परियोजना की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से चला आ रहा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और पूरा देश इस दिन को हमेशा याद रखेगा।

यह माता वैष्णो देवी धाम की पहाड़ियों से सटे क्षेत्र में बनाया जाएगा। इसके निर्माण का विचार सबसे पहले वर्ष 1967 में रखा गया था। वर्ष 2025 में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड और संबंधित जमीन मालिकों के बीच एक समझौता हुआ। जमीन मालिकों ने मंदिर तक जाने के लिए सड़क (मोटरेबल ट्रैक) और यात्रियों की सुविधाओं जैसे शौचालय और पानी की व्यवस्था के लिए 41 कनाल भूमि दान करने पर सहमति दी।

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने शंकराचार्य मंदिर के निर्माण का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही पहुंच मार्ग, सार्वजनिक सुविधाएं और जमीन मालिकों के लिए 50 व्यावसायिक दुकानें भी बनाई जाएंगी। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 31.51 करोड़ रुपए है। यह मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध करेगा और साथ ही क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा। श्राइन बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि यह धार्मिक स्थल जीवंत और सक्रिय रहे, जहां श्रद्धालुओं की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए और साथ ही स्थानीय समुदायों की समृद्धि में भी योगदान हो।

इस परियोजना के शिलान्यास के मौके पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि पीढ़ियों से चला आ रहा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और पूरा देश इस दिन को हमेशा याद रखेगा। कटरा में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की पहाड़ियों से सटे क्षेत्र में 1960 के दशक में परिकल्पित शंकराचार्य मंदिर की आधारशिला रखी गई।

उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर पर कुल 31.51 करोड़ रुपए का खर्च आएगा, जिसे पूरा का पूरा श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड वहन करेगा। मंदिर परिसर में 50 व्यावसायिक दुकानें भी बनाई जाएंगी, जिन्हें पवित्र उद्देश्य के लिए जमीन दान करने वाले भूमि मालिकों को आवंटित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, रियासी और आसपास के क्षेत्रों की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला उद्यमियों से भी बातचीत की गई। पूजा सामग्री और प्रसाद की वार्षिक खरीद को वर्तमान 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 12 करोड़ रुपए किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में आजीविका के अवसरों को काफी मजबूती मिलेगी।
 
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