असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का ऐतिहासिक कदम, PMS पोर्टल लॉन्च; कर्मचारियों को मिलेगा सरकारी दर्जा

असम के मुख्यमंत्री ने प्रोविंशियलाइजेशन मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल लॉन्च किया


गुवाहाटी, 18 फरवरी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को प्रोविंशियलाइजेशन मैनेजमेंट सिस्टम (पीएमएस) पोर्टल लॉन्च किया। सरकार ने इसे वेंचर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स और उनके स्टाफ के प्रोविंशियलाइजेशन के लंबे समय से रुके मामलों को हल करने की दिशा में एक पारदर्शी और निर्णायक कदम बताया।

लोक सेवा भवन में डिजिटल प्लेटफॉर्म का अनावरण करते हुए सरमा ने कहा कि पीएमएस पोर्टल असम एजुकेशन (टीचर्स की सेवाओं का प्रोविंशियलाइजेशन और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स का री-ऑर्गनाइजेशन) एक्ट, 2017 के तहत काम करेगा, जिसे 2025 में संशोधित किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से नॉन-प्रोविंशियलाइज्ड वेंचर स्कूलों और कॉलेजों के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ के आवेदन आसान होंगे, उनकी मॉनिटरिंग होगी और प्रोसेसिंग भी सुगम होगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह पहल गवर्नेंस सुधार और कल्याण उपाय दोनों के रूप में अहम है। इस पोर्टल के जरिए वेंचर इंस्टीट्यूशन्स और उनके कर्मचारियों का सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस तैयार होगा, जिससे दशकों से प्रोविंशियलाइजेशन प्रक्रिया में रुकावट डालने वाली उलझन और कथित गड़बड़ियों को खत्म किया जा सकेगा।

सरमा ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार के दौरान 2011 से अब तक प्राइमरी, सेकेंडरी और कॉलेज लेवल पर 50,000 से अधिक टीचरों को विभिन्न चरणों में सरकारी सेवाओं में शामिल किया गया। उन्होंने बताया कि पीएमएस पोर्टल का यह लॉन्च तीसरा और सबसे बड़ा चरण है।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी माना कि मौजूदा नियमों के तहत सभी आवेदनकर्ता क्वालिफाई नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार ही होगी।

उन्होंने बताया कि सरकार ने 17 फरवरी को पेश किए गए वोट-ऑन-अकाउंट बजट में ‘गुरुदक्षिणा’ स्कीम शुरू की है। इस स्कीम के तहत उन लोगों को वित्तीय सहायता दी जाएगी जिनकी सेवाओं को राज्य सरकार अब सीधे नहीं दे सकती।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को दूसरी सरकारी नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा करने में मदद करने के लिए एक विशेष मार्किंग सिस्टम भी तैयार किया जाएगा। सरमा ने यह स्पष्ट किया कि इस योजना के लिए सिर्फ 1 जनवरी, 2006 से पहले स्थापित संस्थान ही पात्र होंगे। आवेदकों को इसके लिए मान्यता प्रमाण पत्र, जमीन के दस्तावेज, अकादमिक प्रदर्शन की जानकारी और स्टाफ के क्रेडेंशियल जमा करने होंगे।

सभी स्टेकहोल्डर्स से सहयोग की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कानूनी और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखते हुए वेंचर इंस्टीट्यूशन्स के कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

लॉन्च के समय शिक्षा मंत्री रनोज पेगु, वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षा बोर्ड के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस कदम को राज्य में महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसरों से पहले शिक्षकों के समर्थन को मजबूत करने वाला रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
 

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