सुप्रीम कोर्ट का अजमेर दरगाह-शिव मंदिर विवाद पर बड़ा फैसला: सुनवाई रोकने की याचिका खारिज, रास्ता खुला

सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर दरगाह में शिव मंदिर के दावे से जुड़ी सुनवाई रोकने वाली याचिका खारिज की


नई दिल्ली, 18 फरवरी। सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे से जुड़े मामले में सुनवाई पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।

यह याचिका दरगाह को मानने वाले दरवेश समुदाय के लोगों ने दायर की थी। कोर्ट ने याचिका को तकनीकी आधार पर खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अजमेर की निचली अदालत में चल रहे मुख्य मामले के पक्षकार नहीं हैं।

उन्होंने अपनी याचिका में उन मूल पक्षकारों को भी शामिल नहीं किया था, जिन्होंने यह दावा किया है कि दरगाह किसी प्राचीन शिव मंदिर के अवशेषों पर बनी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आधार पर याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता।

याचिका में दावा किया गया था कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप (एक्ट) 1991 की वैधता से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर 2024 को अंतरिम आदेश दिया था। इस आदेश में कहा गया था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े किसी नए मुकदमे को देश भर की कोई निचली अदालत स्वीकार न करे और ऐसे मामलों में कोई प्रभावी आदेश न पास करे।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस आदेश की अवहेलना करते हुए अजमेर की अदालत ने इस विवाद पर सुनवाई शुरू की है और नोटिस जारी किए हैं, इसलिए अजमेर कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाई जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता निचली अदालत के मूल केस में शामिल नहीं हैं, इसलिए वे सीधे सुप्रीम कोर्ट में इस तरह की मांग नहीं कर सकते। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का मुख्य केस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

यह मामला काफी संवेदनशील है क्योंकि अजमेर शरीफ दरगाह सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है, जो लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। अजमेर की निचली अदालत में यह मामला अभी भी लंबित है और आगे की सुनवाई जारी रहेगी।
 
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