अमित शाह ने गांधीनगर में 'सहकार से समृद्धि' पर किया मंथन, ₹265 करोड़ के प्रोजेक्ट्स से सहकारिता को मिलेगी रफ्तार

गांधीनगर में गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में ‘सहकार से समृद्धि’ मंथन बैठक आयोजित


गांधीनगर, 17 फरवरी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गुजरात की राजधानी गांधीनगर में ‘सहकार से समृद्धि’ अभियान के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों के साथ ‘मंथन बैठक’ की अध्यक्षता की।

इस दौरान उन्होंने इथेनॉल, ऊर्जा, जैविक पोटाश, वेयरहाउस और प्रोटीन पाउडर प्लांट से जुड़ी 265 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

बैठक में केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, मुरलीधर मोहोल, सहकारिता मंत्रालय के सचिव और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने सहकारिता क्षेत्र की ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ और अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष पर आधारित रिपोर्ट का विमोचन किया तथा प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने सोलर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेलीकॉम क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में रक्षा क्षेत्र में भी भारत शीर्ष देशों में शामिल होगा।

उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य केवल आर्थिक आंकड़ों से पूरा नहीं होगा, बल्कि 140 करोड़ लोगों को सम्मानजनक जीवन देने की व्यवस्था करनी होगी, और इसमें सहकारिता की अहम भूमिका होगी।

शाह ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास और पशुपालन को मजबूत किए बिना देश का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में वैज्ञानिक तरीके से सहकारिता क्षेत्र को आगे बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब दिखने लगे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने सहकारिता को मजबूत करने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष बल दिया। अन्न भंडारण व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में अनाज उत्पादन के अनुपात में भंडारण क्षमता लगभग 30 प्रतिशत है, जिसे तीन गुना बढ़ाने की जरूरत है। इसमें सहकारिता क्षेत्र की बड़ी भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने राज्यों से बड़े गोदाम बनाने और भंडारण व्यवस्था को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।

सर्कुलैरिटी और इथेनॉल पर उन्होंने कहा कि बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और इथेनॉल, खाद और गैस जैसे बहु-उत्पाद मॉडल अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर बनाई गई सहकारी संस्था मिलों को विविध उत्पादों से जोड़ने में मदद करेगी।

इसके साथ ही इंश्योरेंस क्षेत्र को लेकर उन्होंने सुझाव दिया कि हर प्राथमिक कृषि ऋण समिति को इफ्को-टोक्यो इंश्योरेंस कंपनी का एजेंट बनाया जाए, जिससे सहकारिता क्षेत्र बीमा में भी बड़ी भूमिका निभा सके।

‘सहकारिता में सहकार’ पर अमित शाह ने कहा कि सभी सहकारी संस्थाओं के बैंक खाते जिला सहकारी बैंकों में होने चाहिए और सरकारी योजनाओं में सहकारी बैंकों को नोडल एजेंसी बनाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि भविष्य में दिहाड़ी मजदूरों, बढ़ई, प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन जैसे श्रमिकों के लिए भी सहकारी समितियां बनाई जाएंगी, ताकि उन्हें उचित पारिश्रमिक और सम्मान मिल सके। शाह ने कहा कि आने वाले समय में देश की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी सहकारिता से जुड़ सकती है।

बैठक में 2 लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की प्रगति की समीक्षा की गई। विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के तहत आधुनिक गोदामों के नेटवर्क विस्तार पर भी चर्चा हुई।

राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं-नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड, नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड में राज्यों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

इसके अलावा सहकारी गन्ना मिलों की आर्थिक मजबूती, डेयरी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी, अमूल और एनडीडीबी के सहयोग से नई डेयरी समितियों के गठन, सहकारी बैंकों से जुड़ी चुनौतियों के समाधान और डिजिटलाइजेशन जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के बेहतर उपयोग, मानव संसाधन विकास, प्रशिक्षण और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी राज्यों से अपेक्षाएं साझा की गईं।
 
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