हैदराबाद, 17 फरवरी। कांग्रेस ने मंगलवार को तेलंगाना में सात और नगरपालिकाओं पर कब्जा कर लिया, जबकि मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने एक शहरी निकाय में जीत दर्ज की।
तीन नगरपालिकाओं में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव को कोरम की कमी और कांग्रेस-बीआरएस कार्यकर्ताओं के बीच झड़पों के कारण फिर से टालना पड़ा। सोमवार को भी हिंसा सहित विभिन्न कारणों से चुनाव नहीं हो सके थे। विपक्ष ने सत्तारूढ़ दल पर गुंडागर्दी और अलोकतांत्रिक तरीकों का आरोप लगाया।
अविभाजित वारंगल जिले की जनगांव और थोरूर नगरपालिकाओं में फिर तनाव देखने को मिला। दोनों जगह वोट बराबर रहने पर विजेता का फैसला लॉटरी से हुआ और किस्मत कांग्रेस के पक्ष में रही।
कांग्रेस ने येल्लंदु, सुल्तानाबाद, डोर्नाकल और जहीराबाद नगरपालिकाओं में आराम से जीत दर्ज की। कागजनगर में उसने भाजपा के समर्थन से कब्जा किया। वहीं बीआरएस ने इंदेरेशम नगरपालिका में जीत हासिल की।
इब्राहिमपट्टनम नगरपालिका में बीआरएस उम्मीदवार अध्यक्ष चुना गया, लेकिन हाईकोर्ट की रोक के बाद राज्य चुनाव आयोग ने प्रक्रिया रोक दी।
16 सदस्यीय थोरूर नगरपालिका में बीआरएस के नौ और कांग्रेस के सात सदस्य थे। पलाकुर्थी विधायक यशस्विनी रेड्डी और वारंगल सांसद कडियम काव्या (दोनों पदेन सदस्य) के वोट से कांग्रेस की संख्या भी नौ हो गई। लॉटरी में कांग्रेस के श्रवण अध्यक्ष चुने गए। पूर्व मंत्री ई. दयाकर राव के नेतृत्व में बीआरएस नेताओं ने पदेन सदस्य के वोट पर विरोध जताया और लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया।
30 सदस्यीय जनगांव में बीआरएस को 13 वार्ड और दो निर्दलीयों का समर्थन मिला था। पदेन सदस्य और बीआरएस विधायक पल्ला राजेश्वर रेड्डी के वोट से उसकी संख्या 16 हुई। कांग्रेस को 12 वार्ड, सहयोगी दल सीपीआई को एक वार्ड और दो निर्दलीयों का समर्थन मिला। पदेन सदस्य व भोंगीर सांसद किरण कुमार रेड्डी के वोट से कांग्रेस भी 16 पर पहुंच गई। यहां भी लॉटरी से कांग्रेस की बलमणि अध्यक्ष चुनी गईं, जबकि बीआरएस समर्थित निर्दलीय उपाध्यक्ष बने।
मंगलवार की जीत के बाद कांग्रेस का कुल आंकड़ा 91 नगरपालिकाओं तक पहुंच गया। 11 फरवरी को 116 नगरपालिकाओं के लिए मतदान हुआ था और 13 फरवरी को नतीजे घोषित किए गए थे। बीआरएस ने 18 और भाजपा ने एक नगरपालिका पर कब्जा किया। तीन नगरपालिकाओं में निर्दलीय अध्यक्ष चुने गए। हालांकि, कांग्रेस को 66 नगरपालिकाओं में स्पष्ट बहुमत मिला था, लेकिन अन्य 25 नगरपालिकाओं में उसने सहयोगी दलों और निर्दलीयों के समर्थन से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद जीते।
116 नगरपालिकाओं के साथ सात नगर निगमों में भी चुनाव हुए। कांग्रेस ने महबूबनगर, मंचेरियल, नलगोंडा और रामागुंडम नगर निगमों में मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पद जीते। कोठागुडेम नगर निगम में सीपीआई का मेयर बना, जबकि कांग्रेस ने डिप्टी मेयर पद हासिल किया। 60 सदस्यीय निगम में दोनों दलों को 22-22 सीटें मिली थीं।
निजामाबाद नगर निगम में कांग्रेस का मेयर चुना गया, जबकि एआईएमआईएम को डिप्टी मेयर पद मिला। भाजपा ने कुछ निर्दलीयों के समर्थन से करीमनगर नगर निगम पर कब्जा किया। तेलंगाना में इन नतीजों के बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस की स्थानीय निकायों में पकड़ और मजबूत होती दिख रही है।