इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: तकनीक और मानव विशेषज्ञता का मेल ही तय करेगा एआई का भविष्य

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: तकनीक और मानव विशेषज्ञता का मेल ही तय करेगा एआई का भविष्य


नई दिल्ली, 17 फरवरी। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के दूसरे दिन भी देश-दुनिया के कई दिग्गज नेता और लीडर्स उपस्थित रहे। इस दौरान संस्कृति मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार रंजना चोपड़ा ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में कहा कि यह समिट विभिन्न मंत्रालयों, स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों को अपने एआई नवाचार दिखाने का शानदार अवसर दे रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्रालय ने हाल ही में एक डिजिटल समाधान विकसित किया है, जिसके जरिए कंटेंट को चार जनजातीय भाषाओं में अनुवाद किया जा सकता है। इस पहल को समिट में काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और कई एजेंसियों ने इसमें रुचि दिखाई है।

उन्होंने आगे कहा कि यह समिट युवाओं के लिए भी बेहद उपयोगी है, क्योंकि यहां वे अपने रोजमर्रा की समस्याओं के लिए विकसित एआई समाधान देख सकते हैं। साथ ही यह मंच उन्हें प्रेरणा, नेटवर्किंग और रोजगार के अवसर भी प्रदान करता है।

वहीं, सीओएआई (सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. एसपी कोचर ने टेलीकॉम सेक्टर में एआई की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि एआई का पूरा संचालन टेलीकॉम नेटवर्क पर ही निर्भर करता है। डेटा सेंटर में डेटा स्टोर होता है, लेकिन उसे लाने-ले जाने का काम टेलीकॉम नेटवर्क के जरिए ही होता है। उन्होंने कहा कि 5जी नेटवर्क पर अभी तक पूरी तरह से व्यावसायिक लाभ नहीं मिला है, लेकिन एआई एक ऐसी तकनीक है जिससे 5जी के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने कहा कि समिट में दिखाई जा रही एआई एप्लिकेशन आम लोगों के लिए उपयोगी हैं और उनकी खपत बढ़ने से टेलीकॉम नेटवर्क को भी फायदा होगा। आने वाले समय में 5जी नेटवर्क पर एआई आधारित सेवाओं से नेटवर्क और अधिक सक्षम होगा।

डॉ. कोचर ने जोर देकर कहा कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक मजबूत नेटवर्क पहुंचाना बेहद जरूरी है। बिना कनेक्टिविटी के एआई वहां काम नहीं कर सकता। इसलिए फाइबरेजेशन और 'राइट ऑफ वे' (आरओडब्ल्यू) जैसी सुविधाओं को हर गांव तक पहुंचाना सरकार और उद्योग दोनों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि जब देश के हर हिस्से में नेटवर्क पहुंचेगा, तब एआई आधारित सेवाएं भी वहां पहुंचेंगी और लोग घर बैठे काम कर सकेंगे, जैसा कि आज बड़े शहरों में संभव है। आने वाले समय में एआई देश के विकास में अहम भूमिका निभाएगा।

इसके आलावा, समिट में आईएमईआरआईटी की सीईओ और फाउंडर राधा रामास्वामी बसु ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि अब एआई का अगला चरण बड़े मॉडलों से आगे बढ़कर उन्हें वास्तविक उपयोग के योग्य बनाने का है। उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियों ने बड़े एआई मॉडल तैयार कर दिए हैं, लेकिन अब असली चुनौती है मानव विशेषज्ञता को इन मॉडलों से जोड़ना। इसे उन्होंने 'एक्सपर्ट इन द लूप' या 'ह्यूमन इन द लूप' बताया, जो आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि अब सामान्य एआई मॉडल से आगे बढ़कर विशेष क्षेत्रों जैसे बीमा, हेल्थकेयर और कृषि के लिए उद्देश्य आधारित (डोमेन-आधारित) समाधान विकसित किए जाएंगे। खासकर कृषि क्षेत्र में छोटे भाषा मॉडल और विजन मॉडल जैसे एआई टूल्स समाज के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं।

राधा बसु ने बताया कि उनकी कंपनी पिछले आठ वर्षों से एआई के क्षेत्र में काम कर रही है और भारत में 9,500 से 10,000 तक नौकरियां पैदा कर चुकी है। उन्होंने कहा कि गणितज्ञ, बीमा विशेषज्ञ, कार्डियोलॉजिस्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे विशेषज्ञों की जानकारी एआई मॉडल को बेहतर बनाती है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर अकाउंटिंग के क्षेत्र में एआई बनाना है, तो चार्टर्ड अकाउंटेंट की विशेषज्ञता जरूरी होगी, क्योंकि एआई मॉडल खुद यह ज्ञान नहीं रखता।
 

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