तेजस्वी का संकल्प: कर्पूरी ठाकुर की विरासत और विचार बिहार से दिल्ली तक, हर घर पहुंचाएंगे सामाजिक न्याय

कर्पूरी ठाकुर के विचारों और आकांक्षाओं को बिहार से दिल्ली तक ले जाना चाहिए: तेजस्वी यादव


पटना, 17 फरवरी। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर के विचारों और आकांक्षाओं को बिहार से दिल्ली तक ले जाना चाहिए और देश के हर घर तक पहुंचाना चाहिए। तेजस्वी भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की 38वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बोल रहे थे।

पटना के बापू सभागार में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि राजद सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और गरीबों एवं वंचितों के लिए संघर्ष को मजबूत करके कर्पूरी ठाकुर और लालू प्रसाद यादव की विरासत को आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार और केंद्र दोनों जगह नफरत फैलाने वाली ताकतें सत्ता में हैं और उन पर देश के संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर करने का आरोप लगाया।

लालू प्रसाद यादव की कैद का जिक्र करते हुए तेजस्वी ने कहा कि यह एक साजिश का हिस्सा था, लेकिन लालू प्रसाद ने कभी भी विभाजनकारी ताकतों के आगे घुटने नहीं टेके।

तेजस्वी ने कहा कि उनकी ही तरह, मैं भी उन लोगों के सामने कभी नहीं झुकूंगा जो नफरत का माहौल बनाकर संविधान को कमजोर करना चाहते हैं।

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में जन प्रतिनिधियों की आवाज नहीं सुनी जा रही है और भ्रष्टाचार ने शासन को जकड़ लिया है।

उन्होंने दावा किया कि दुष्कर्म और अपराध की बढ़ती घटनाएं मौजूदा सरकार की असलियत उजागर करती हैं, और स्थिति को महाजंगल राज करार दिया।

उन्होंने ईडी, सीबीआई और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया और कहा कि पिछले बिहार चुनावों में जनता हारी और व्यवस्था जीत गई।

उन्होंने यह भी कहा कि खर्चीले चुनावों ने गरीबों के लिए चुनाव लड़ना मुश्किल बना दिया है, जिससे लोकतंत्र पैसे से चलने वाली व्यवस्था में बदल गया है।

राजद को जनता का भरोसेमंद दल बताते हुए, तेजस्वी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर न केवल बिहार में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी संघर्ष और जन आंदोलनों के माध्यम से संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया।

उन्होंने राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर, जगदेव प्रसाद और जयप्रकाश नारायण के विचारों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

अपने पारिवारिक स्मृतियों को याद करते हुए तेजस्वी ने कहा कि वे स्वयं कर्पूरी ठाकुर से कभी नहीं मिले, लेकिन उनके माता-पिता की यादें उन्हें बहुत प्रेरित करती हैं।

उन्होंने बताया कि उनकी माताजी अक्सर उन्हें बताती थीं कि कर्पूरी ठाकुर हमेशा गरीबों और सादगी की बात करते थे।
 

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