टीपू सुल्तान विवाद: महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख ने छत्रपति शिवाजी महाराज के समर्थकों से माफी मांगी

टीपू सुल्तान विवाद: महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख ने छत्रपति शिवाजी महाराज के समर्थकों से माफी मांगी


मुंबई, 17 फरवरी। छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना करने को लेकर चल रहे विवाद के बीच महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मंगलवार को खेद व्यक्त किया और शिवाजी के समर्थकों से अपने शब्दों के दुरुपयोग के लिए माफी मांगी।

उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

उन्होंने भाजपा पर उनके शब्‍दों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाते हुए उसकी निंदा की और कहा कि भाजपा की इस हरकत के कारण शिवाजी भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं।

सपकाल ने अफसोस जताने और माफी मांगने का फैसला किया, खासकर तब जब भाजपा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनके बयान की बुराई की और चेतावनी दी कि राज्य में इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज महाराष्ट्र और पूरे भारत में एक पूजनीय व्यक्ति हैं, जो अपनी बहादुरी, न्याय और मराठा साम्राज्य की स्थापना के लिए जाने जाते हैं। इसके उलट, टीपू सुल्तान की विरासत पर अक्सर बहस होती है, कुछ लोग उन्हें हिंदुओं के साथ उनके बर्ताव और फ्रांसीसियों के साथ उनके गठबंधन के कारण एक विवादित व्यक्ति के रूप में देखते हैं।”

इसी प्रकार, छत्रपति शिवाजी महाराज के समर्थकों और कुछ विशेषज्ञों ने छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना करने के सपकाल के कदम पर चिंता व्यक्त की।

सपकाल ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर पोस्‍ट कर कहा, "मैं एक बार फिर स्पष्ट और दृढ़ता से कहता हूं कि छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता अतुलनीय है। वे मेरे आदर्श, मेरी प्रेरणा और मेरा गौरव हैं। उनकी तुलना किसी से करने का प्रश्न ही नहीं उठता। मैंने कहा था कि टीपू सुल्तान ने छत्रपति शिवाजी महाराज को अपना आदर्श माना और अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई लड़ने के लिए उनसे प्रेरणा ली। उनके योगदान को स्वीकार करते हुए उनका चित्र भारत के संविधान में भी अंकित है।"

उन्‍होंने आगे कहा, "मेरे बयान का मूल भाव यह था कि उनकी छवि को लेकर समाज में कोई तनाव उत्पन्न नहीं होना चाहिए, सभी को आपसी सम्मान और भाईचारा बनाए रखना चाहिए। इतिहास पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इस पर चर्चा संयमित और सुविचारित होनी चाहिए, समाज में संघर्ष पैदा किए बिना हमें जाति, धर्म या संप्रदाय के आधार पर ध्रुवीकरण को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। यही मेरा दृष्टिकोण था।

सपकाल ने आगे कहा कि उनके 70 सेकंड के बयान का सार यह था कि सरकारी कार्यालयों में विभिन्न महान हस्तियों की तस्वीरें एक साथ लगाने से समाज में तनाव पैदा नहीं होना चाहिए, बल्कि एकता का संदेश देना चाहिए।

उन्‍होंने आगे कहा, "दुर्भाग्यवश, उस बयान के एक शब्द के संदर्भ को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। सोशल मीडिया पर चलाए गए दुष्प्रचार अभियानों में मेरे मुंह से ऐसे शब्द गवाए गए हैं जो मैंने कभी नहीं बोले, जिससे यह गलत धारणा बनी कि मैंने छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना की थी। यह दुष्प्रचार भाजपा और उसके सहयोगियों द्वारा सुनियोजित रूप से फैलाया गया है। हमने पुणे में देखा कि कैसे इसी आधार पर राज्य में धार्मिक तनाव भड़काने और दंगे उकसाने के प्रयास किए गए।

सपकाल ने कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम जनता से अपील की कि वे दुष्प्रचार अभियानों पर विश्वास न करें बल्कि सामाजिक सद्भाव बनाए रखें क्योंकि शिवाजी जयंती (छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती) बस दो दिन दूर है।
 

Similar threads

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
7,931
Messages
7,963
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top