जालंधर में ईडी का शिकंजा: डिजिटल अरेस्ट ठगी के 1.76 करोड़ रुपए का बैंक बैलेंस अटैच, उद्योगपति हुए थे शिकार

पंजाब : जालंधर ईडी की कार्रवाई, डिजिटल अरेस्ट ठगी केस में 1.76 करोड़ रुपए का बैंक बैलेंस अटैच किया


जालंधर, 17 फरवरी। जालंधर जोनल ऑफिस, डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ईडी) ने 14 फरवरी 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया। इस ऑर्डर के तहत एस. पी. ओसवाल के डिजिटल अरेस्ट केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 1.76 करोड़ रुपए का बैंक बैलेंस अटैच किया गया है।

अटैच की गई राशि एक म्यूल एंटिटी मेसर्स मृत्युंजय मल्टीट्रेड के बैंक अकाउंट में पड़ी थी, जिसका इस्तेमाल विभिन्न साइबर क्राइम और डिजिटल अरेस्ट मामलों से प्राप्त अवैध धन को प्राप्त करने और ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। ईडी ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, लुधियाना द्वारा बीएनएसएस, 2023 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की।

जांच में सामने आया कि ठगों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारी बताकर लुधियाना के प्रसिद्ध उद्योगपति और वर्धमान ग्रुप के चेयरमैन एस. पी. ओसवाल को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया। अगस्त 2023 में हुई इस ठगी में उनसे 7 करोड़ रुपए ऐंठे गए।

आरोपी रूमी कलिता और अर्पित राठौर ने कई खच्चर (म्यूल) खातों के माध्यम से यह राशि ट्रांसफर की। रूमी कलिता ने अतनु चौधरी के साथ मिलकर मेसर्स फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के बैंक खाते का इस्तेमाल अवैध आय को सफेद करने के लिए किया। इसी तरह मेसर्स रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के खातों में भी अन्य साइबर अपराधों से प्राप्त धन जमा किया गया।

ईडी की जांच से पता चला कि अपराध की आय को व्यवस्थित तरीके से कई म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, जिससे धन को मोड़ना और छिपाना आसान हो गया। धन का एक हिस्सा शेल संस्थाओं के माध्यम से आगे भेजा गया और व्यापार-आधारित मनी लॉन्ड्रिंग तंत्र अपनाकर भारत के बाहर ट्रांसफर कर दिया गया। 28 अगस्त 2024 को अन्य साइबर क्राइम से हुई कमाई भी फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग के अकाउंट में जमा की गई थी। म्यूल अकाउंट आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लोन या नौकरी का झूठा वादा करके खोले गए थे।

इस मामले में ईडी ने पहले भी कार्रवाई की है। 31 जनवरी 2025, 22 दिसंबर 2025 और 31 दिसंबर 2025 को तलाशी ली गई। रूमी कलिता को 23 दिसंबर 2025 और अर्पित राठौर को 31 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपी फिलहाल ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। जांच में पता चला कि यह गिरोह अन्य पीड़ितों से भी करीब 1.73 करोड़ रुपए की ठगी कर चुका है। कुल 200 से अधिक म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया गया।

ईडी का दावा है कि जांच से साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें विदेशी अपराधियों से भी संपर्क थे। आगे की जांच जारी है, जिसमें और सबूत जुटाए जा रहे हैं और संभावित अन्य आरोपी सामने आ सकते हैं।
 

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
7,935
Messages
7,967
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top