ममता बनर्जी की कैबिनेट ने राज्य गठित सेवाओं के लिए 20 प्रतिशत अतिरिक्त पद बनाने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

ममता बनर्जी की कैबिनेट ने राज्य गठित सेवाओं के लिए 20 प्रतिशत अतिरिक्त पद बनाने के प्रस्ताव को दी मंजूरी


कोलकाता, 17 फरवरी। पश्चिम बंगाल में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी है। इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा फैसला लिया।

सीएम ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि यह बताते हुए खुशी हो रही है कि बड़ी ज़िम्मेदारियों के लिए अनुभवी अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और अलग-अलग राज्य गठित सेवाओं में बराबरी लाने के लिए राज्य कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया।

उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने मंगलवार को नौ राज्य गठित सेवाओं के लिए अलग-अलग पे-लेवल में 20 प्रतिशत अतिरिक्त पद बनाने के ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बाकी सभी राज्य गठित सेवाओं में भी इसी तरह अतिरिक्त पद बनाने के लिए सैद्धांतिक अनुमति दे दी गई है।

मुख्यमंत्री ममता ने आगे कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि यह पहली बार है कि बेहतर गवर्नेंस के लिए सभी राज्य गठित सेवाओं के कैडर शेड्यूल को पूरी तरह से अपडेट किया गया है। इससे सीनियर लेवल पर ठहराव कम होगा और एक जैसी स्थिति वाली राज्य गठित सेवाओं में बराबरी आएगी।

बता दें कि पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासत तेज है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से एसआईआर का विरोध किया जा रहा है। एसआईआर के विरोध में सीएम ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) मामले पर सुनवाई हुई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अन्य नेताओं की याचिकाओं पर यह सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में दस्तावेजों की पड़ताल और फाइनल वोटर लिस्ट की समयसीमा को 1 हफ्ते बढ़ाया। पहले फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने की डेडलाइन 14 फरवरी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार सुनिश्चित करें कि उसकी ओर से उपलब्ध कराए गए 8505 ग्रुप बी के अधिकारी निर्वाचन अधिकारी (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) को रिपोर्ट करें। ईसीआई चाहे तो अपने अधिकारियों की जगह इन अधिकारियों की सेवा ले सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि माइक्रो ऑब्जर्वर या ग्रुप बी के अधिकारियों की भूमिका सिर्फ ईआरओ को सहयोग करने की रहेगी। वोटर लिस्ट पर अंतिम फैसला ईआरओ ही लेंगे।
 
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