विशाखापत्तनम में IFR: गाजी की कब्र पर फिर 'निस्तार', 1971 के जख्मों पर छिड़केगा नमक पाकिस्तान

आईएफआर से पाकिस्तान के जख्म होंगे हरे, पीएनएस गाजी की कब्र पर फिर खड़ा होगा 'निस्तार'


विशाखापत्तनम, 17 फरवरी। भारतीय नौसेना के साल 2026 के सबसे बड़े आयोजनों इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) और मिलन में पाकिस्तान और चीन को हमेशा बाहर रखा जाता है। लेकिन, पाकिस्तान के जख्म हरे करने के लिए यह इवेंट ही काफी है। वजह है इसका आयोजन विशाखापत्तनम में होना। यह वही जगह है, जहां 1971 की जंग के दौरान पाकिस्तानी नेवी की सबमरीन पीएनएस गाजी को हमेशा के लिए समंदर की तलहटी में सुला दिया गया था।

जब उसे ढूंढने के लिए डाइविंग ऑपरेशन चलाया गया, तो यह काम नेवी के तत्कालीन आईएनएस निस्तार ने अंजाम दिया था। अब रिटायर हो चुके आईएनएस 'निस्तार' का स्वदेशी संस्करण 55 साल बाद उसी जगह पर मौजूद है, जहां गाजी की कब्र है। नौसेना के मुताबिक, इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में स्वदेशी आईएनएस निस्तार हिस्सा ले रहा है।

गौरतलब है कि भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत को निशाना बनाने आए पीएनएस गाजी को नेवी के आईएनएस राजपूत ने समंदर की गहराई में डूबो दिया था। अब उसी जगह पर स्वदेशी आईएनएस विक्रांत भी मौजूद है।

आईएनएस निस्तार की खासियत-

इस डाइविंग सपोर्ट वेसल की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी है। 18 जुलाई 2025 को भारतीय नौसेना को पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल मिला। इससे पहले लंबे समय तक भारतीय नौसेना के पास कोई डाइविंग सपोर्ट वेसल नहीं था। इस कमी को पूरा करने के लिए नौसेना ने दो डाइविंग सपोर्ट वेसल लेने का फैसला किया। एक का नाम रखा गया निस्तार और दूसरे का नाम निपुण। दुनिया के गिने-चुने देशों के पास ही विशेष सबमरीन रेस्क्यू सपोर्ट वेसल मौजूद हैं। यह देश का पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल है, जो सबमरीन ऑपरेशन के दौरान गेमचेंजर साबित होगा। इसके नाम की बात करें तो ‘निस्तार’ संस्कृत शब्द है, जिसका मतलब होता है मुक्ति या उद्धार।

'निस्तार' की खासियत यह है कि यह किसी भी पनडुब्बी आपातकाल के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन को सपोर्ट करेगा। इन वेसलों के जरिए डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (डीएसआरवी) को ले जाया जाएगा, जो गहरे समुद्र में गोता लगाकर सबमरीन से रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देगा। अगर समुद्र में किसी सबमरीन में कोई दिक्कत आ जाती है या वह डूब जाती है, तो ऐसी स्थिति में उसमें फंसे नौसैनिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए इस वेसल का इस्तेमाल किया जाएगा।

यह डाइविंग सपोर्ट वेसल 120 मीटर लंबा है और इसका वजन लगभग 10,000 टन है। यह आधुनिक डाइविंग उपकरणों से लैस है। यह 18 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से समुद्र में चल सकता है। यह वेसल लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी है।

'निस्तार' क्लास प्रोजेक्ट के तहत कुल दो डाइविंग सपोर्ट वेसल नेवी में शामिल किए जाने हैं। निस्तार शामिल हो चुका है, जबकि निपुण पर काम जारी है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड इसका निर्माण कर रही है। दोनों वेसलों के निर्माण के लिए साल 2018 में डील साइन की गई थी। डील साइन होने के 36 महीने के अंदर दोनों वेसल नौसेना को मिल जानी चाहिए थीं, लेकिन कोविड के चलते थोड़ी देरी हुई।
 
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