सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या नहीं, ज्योतिषाचार्य ने दी विशेष सलाह

ग्रहण के दौरान दैवीय आपदाओं से बचने के लिए ज्योतिषाचार्य ने दी पूजा की सलाह


अयोध्या, 17 फरवरी। इस साल का पहला सूर्यग्रहण मंगलवार को लगा। इस सूर्यग्रहण का समय है, भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से शुरू होकर और शाम 7 बजकर 57 मिनट तक। यह शाम करीब 5 बजकर 42 मिनट के आसपास चरम पर रहेगा।

इस पर ज्योतिषाचार्य कल्कि राम और राकेश तिवारी ने अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि सूर्य ग्रहण का धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व होता है और लोगों को इस दौरान सावधानी बरतनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "यह मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका, अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों और दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी क्षेत्रों में नजर आएगा। जहां यह पूरी तरह दिखेगा, वहां सूर्य एक चमकदार घेरे (रिंग) की तरह लगेगा, क्योंकि चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढकेगा।"

ज्योतिषाचार्य कल्कि राम ने बताया कि ग्रहण भारत में नहीं दिखने के बावजूद इसका प्रभाव पड़ना तय है। उन्होंने कहा, "जहां ग्रहण दिखेगा, वहां एक महीने तक या अगले ग्रहण तक असर रहेगा। वहां दैवीय आपदाएं, भूकंप, आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। लोगों के मन में सरकार या शासकों से नाराजगी हो सकती है। खेती पर भी बुरा असर हो सकता है। फसलें कम हो सकती हैं या खराब हो सकती हैं।

उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि सनातन धर्म के लोगों को महामृत्युंजय महामंत्र का जाप और महादेव की पूजा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "खासकर शाम 5:31 से 6:57 बजे तक यज्ञ या पूजा करना फायदेमंद रहेगा। लोग इस भ्रम में नहीं रहें कि अगर यहां पर ग्रहण नहीं है, तो इसका प्रभाव नहीं रहेगा।"

वहीं, ज्योतिषाचार्य राकेश तिवारी ने कहा, "सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले लग जाता है। इस दौरान बच्चे, वृद्ध और बीमार लोगों को छोड़कर अन्य लोग खाना-पीना नहीं करते। मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और पूजा-पाठ नहीं होता। ऐसा तब किया जाता है, जब ग्रहण अपने क्षेत्र में लगे। लेकिन, सूतक तब लागू होता है, जब ग्रहण अपने क्षेत्र में दिखाई देता है। भारत में ग्रहण नहीं दिख रहा है।"
 
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