नई दिल्ली, 17 फरवरी। भारतीय सेना 21 फरवरी को गोवा नेवल वॉर कॉलेज में ‘गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव–2026’ करने जा रही है। इसमें समुद्री आतंकवाद, तस्करी, समुद्री डकैती, अवैध प्रवासन और साइबर खतरों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी इसकी मेजबानी करेंगे।
इस बार 14 देश इसमें शामिल होंगे। बांग्लादेश, इंडोनेशिया, केन्या, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, तंजानिया, मेडागास्कर और कोमोरोस के नौसेना प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी इसमें हिस्सा लेंगे। दरअसल, समुद्र में अवैध, अनियमित और बिना रिपोर्ट के मछली पकड़ना एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इससे न सिर्फ देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि समुद्री संसाधनों पर भी दबाव बढ़ता है। इसके अलावा समुद्री आतंकवाद, तस्करी, समुद्री डकैती, अवैध प्रवासन और अब साइबर खतरे व जलवायु परिवर्तन जैसी नई चुनौतियां भी सामने हैं। कई बार जहाज अपनी पहचान छुपाकर चलते हैं, जिसे ‘डार्क शिपिंग’ कहा जाता है।
ऐसे में अकेला कोई देश इन समस्याओं से नहीं निपट सकता। सबको मिलकर काम करना होगा। इन मुद्दों पर यहां चर्चा की जाएगी। कॉन्क्लेव में इस बात पर जोर रहेगा कि देशों के बीच समुद्री जानकारी तुरंत साझा हो, आपसी तालमेल बढ़े और क्षमता निर्माण पर काम हो। गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच भरोसा मजबूत करने और समुद्र को सुरक्षित रखने की एक साझा कोशिश है। भारत इस पहल के जरिए साफ संदेश दे रहा है कि वह क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा में अहम और जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
यह इस कॉन्क्लेव का पांचवां संस्करण है। यह हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के लिए समुद्री सुरक्षा पर खुलकर बात करने का एक बड़ा और भरोसेमंद मंच बन चुका है। इस कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि रहेंगे। इससे पहले नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ‘वाइस एडमिरल के.के. नय्यर स्मृति व्याख्यान 2026’ में बोलते हुए कहा था कि नौसेना के 50 से ज्यादा जहाज देश में ही बन रहे हैं, जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है। नई तकनीकों जैसे एआई, क्वांटम सिस्टम और बेहतर समुद्री निगरानी पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत इस समय एक अहम समुद्री दौर से गुजर रहा है और नौसेना पूरी तरह तैयार है। नौसेना की तैयारी है कि वह समुद्रों को सुरक्षित रखे, आत्मनिर्भरता को मजबूत करे और विकसित भारत के लक्ष्य में अपनी मजबूत भूमिका निभाए। व्याख्यान में दिवंगत वाइस एडमिरल नय्यर की सादगी, ईमानदारी और देश के प्रति समर्पण को याद किया गया। नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय नौसेना लगातार परिचालन तैनाती, बहुराष्ट्रीय सहयोग और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के माध्यम से देश के समुद्री हितों की रक्षा कर रही है।
साथ ही, 50 से अधिक युद्धपोतों के निर्माण के जरिए स्वदेशी जहाज निर्माण को आगे बढ़ाया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम प्रणालियों तथा उन्नत समुद्री क्षेत्र जागरूकता जैसी उभरती तकनीकों में निवेश किया जा रहा है।