यूपी विधानसभा में जल जीवन मिशन पर तीखी जंग! विपक्ष बोला- योजना फेल, मंत्री बोले- आरोप बेबुनियाद

यूपी विधानसभा में जीवन मिशन पर घमासान, मंत्री बोले- आरोप निराधार


लखनऊ, 16 फरवरी। उत्तर प्रदेश विधानसभा के सोमवार के सत्र में जल जीवन मिशन में कथित अनियमितताओं और ‘हर घर नल’ योजना के क्रियान्वयन को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

समाजवादी पार्टी ने नियम 56 के तहत मामला उठाते हुए सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए, जबकि जलशक्ति मंत्री ने आरोपों को आधारहीन बताते हुए कार्रवाई का ब्यौरा सदन में रखा। इसी दिन बजट पर भी चर्चा शुरू हुई, जिसमें सत्ता पक्ष ने इसे विकासोन्मुखी बताया तो विपक्ष ने ‘झूठ का पुलिंदा’ करार दिया।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सपा के वरिष्ठ सदस्य कमाल अख्तर और प्रभुनारायण सिंह ने नियम 56 के तहत जल जीवन मिशन का मुद्दा उठाया। कमाल अख्तर ने कहा कि सरकार के दावों के बावजूद प्रदेश के अधिकांश जिलों में ‘हर घर नल’ योजना जमीन पर नहीं दिख रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि खराब पेयजल आपूर्ति के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं और एक अनुमान के मुताबिक हर वर्ष लाखों मौतें दूषित पानी से जुड़ी समस्याओं के कारण हो रही हैं। उन्होंने लखीमपुर और सीतापुर में बनी पानी की टंकियों के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ टंकियां निर्माण के तुरंत बाद ढह गईं, जिससे कार्यों की गुणवत्ता पर संदेह पैदा होता है।

उनका कहना था कि प्रदेश के कई जिलों में लोगों को आज भी पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है। अख्तर ने यह भी कहा कि जलशक्ति मंत्री द्वारा पूर्व में सदन में सौ-सौ हैंडपंप लगाने का जो आश्वासन दिया गया था, वह अब तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार से केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्तापक्ष के लोग भी असंतुष्ट हैं।

सपा के ही प्रभुनारायण सिंह ने कहा कि पूर्वांचल में पेयजल की समस्या विकराल है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘हर घर नल’ योजना के दावे कागजी हैं और जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्य नहीं हुआ है। सदन में मौजूद जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सपा सदस्यों के बयान तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि गोरखपुर और बस्ती सहित कई मंडलों में पानी की गुणवत्ता की जांच कराई गई है और वह मानक के अनुरूप पाई गई है। मंत्री ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर कार्रवाई का ब्योरा देते हुए कहा कि अब तक 24 अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है, 192 से अधिक लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है और करीब 400 लोगों को सेवा से बाहर किया गया है। जिन स्थानों पर निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नहीं पाई गई, वहां भुगतान में 10 प्रतिशत की कटौती की गई है।

मंत्री के जवाब से असंतुष्ट सपा सदस्यों ने जल जीवन मिशन की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए विधानसभा की एक समिति गठित करने की मांग की, जिसे विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अस्वीकार कर दिया। याचिकाओं के निस्तारण पर छह माह की समयसीमा इसी सत्र में अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन में दायर याचिकाओं का छह माह के भीतर निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने आश्वासन दिया कि निर्धारित समयसीमा में याचिकाओं के निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी। सोमवार को ही सदन में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट पर चर्चा प्रारंभ हुई।

सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सदस्यों ने बजट को सर्वतोन्मुखी और विकासोन्मुखी बताया। भाजपा के हरिप्रकाश वर्मा ने अपने क्षेत्र जलालाबाद में चीनी मिल की स्थापना की मांग उठाते हुए कहा कि गन्ना किसानों को मिल के अभाव में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

निषाद पार्टी के विवेकानंद पांडेय ने निषाद समाज को आरक्षण दिए जाने की मांग की और कहा कि यह बजट ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने गांवों में उत्सव भवन और स्कूलों की स्थापना के प्रस्ताव को सराहनीय बताया। वहीं, समाजवादी पार्टी के नफीस अहमद और पिंकी सिंह ने बजट को ‘झूठ का पुलिंदा’ बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में न दवाइयां पर्याप्त हैं और न डॉक्टर। उन्होंने सड़कों और सरकारी स्कूलों की स्थिति पर भी सवाल उठाए।
 
Similar content Most view View more

Latest Replies

Forum statistics

Threads
16,711
Messages
16,748
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top