हिमाचल में राज्यपाल के अधूरे अभिभाषण से सियासी भूचाल, वित्त आयोग और अटके प्रोजेक्ट पर सीएम ने दिया करारा जवाब

हिमाचल प्रदेश: बजट सत्र के दौरान विधानसभा में राज्यपाल ने अधूरा छोड़ा अभिभाषण, सीएम ने दी प्रतिक्रिया


शिमला, 16 फरवरी। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने सोमवार को बजट सत्र के पहले दिन विधायकों को चौंका दिया। उन्होंने अपना 50 पन्नों का पारंपरिक संबोधन सिर्फ कुछ मिनटों में खत्म कर दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यपाल ने 16वीं वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद करने के संवेदनशील मुद्दे को टाल दिया, जो छोटे और पहाड़ी राज्यों के लिए अहम है।

हालांकि, उनका मानना है कि राज्यपाल ने मुख्य विपक्षी बीजेपी के लिए सक्रिय रुख तय किया है, जो कांग्रेस सरकार पर वित्तीय असंगति और केंद्रीय फंड वाले बड़े प्रोजेक्ट्स (जैसे मेडिकल डिवाइस पार्क) रोकने का आरोप लगाती रही है। विपक्ष का कहना है कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था को सुधारने वाला प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार और गलत प्रबंधन की वजह से रुका।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में केवल सत्र के एजेंडे के पहले दो पैराग्राफ पढ़े, जिसमें 2025-26 के पूरक मांगों की मंजूरी, 2026-27 का बजट और अन्य विधायी कामकाज का जिक्र था। उन्होंने 50 पन्नों का संबोधन तीन मिनट से भी कम समय में पूरा कर दिया।

उन्होंने कहा, “मेरे संबोधन के पैराग्राफ 3 से 16 एक संवैधानिक संस्था से संबंधित हैं, इसलिए मैं उन्हें नहीं पढ़ना चाहता।”

राज्यपाल ने जो पैराग्राफ छोड़ दिए (15 और 16), उनमें कहा गया था कि 16वें वित्त आयोग का आरडीजी बंद करने का फैसला छोटे और पहाड़ी राज्यों, विशेषकर हिमाचल जैसे विशेष श्रेणी वाले राज्यों पर गंभीर प्रभाव डालेगा।

संबोधन में यह भी बताया गया कि पहाड़ी और सीमा वाले राज्यों में, जहां राजस्व कम है, वहां आरडीजी विकास परियोजनाओं, सामाजिक कल्याण योजनाओं और आपदा प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए अहम भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्यपाल के पूरे पारंपरिक संबोधन को छोड़ने के फैसले को सामान्य बताया और कहा कि यह कोई अपवाद नहीं है, पहले भी राज्यपालों ने संबोधन छोड़ दिए हैं।

राज्य के वित्तीय हालात पर उन्होंने कहा, “यह सरकार का मामला नहीं है। आरडीजी हमारा अधिकार है। राज्य के अधिकारों को नुकसान न पहुंचाया जाए।”
 
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