तमिलनाडु कांग्रेस में पावर शेयरिंग पर रार, अध्यक्ष ने सांसद टैगोर के बयान से पल्ला झाड़ा, कहा- हाईकमान सर्वोच्च

तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष ने पावर शेयरिंग पर सांसद मणिकम टैगोर के बयान से खुद को अलग किया


चेन्नई, 16 फरवरी। तमिलनाडु में पावर शेयरिंग को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) प्रमुख के. सेल्वापेरुन्थागाई ने सोमवार को पार्टी सांसद मणिकम टैगोर के उस बयान की आलोचना की, जिसमें उन्होंने डीएमके के साथ सत्ता साझा करने को लेकर अपने विचार बताए थे। मणिकम टैगोर के बयान पर सेल्वापेरुन्थागाई ने कहा कि कोई भी एआईसीसी नेताओं से बड़ा नहीं है। सेल्वापेरुन्थागाई ने यह भी कहा कि हाईकमान ने पार्टी के सदस्यों को सार्वजनिक तौर पर इस तरह की राय देने से मना किया है।

खबरों के मुताबिक, टैगोर ने 15 फरवरी को तिरुप्परनकुंड्रम में मदुरै दक्षिण जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक में सरकार में हिस्सेदारी की मांग का समर्थन किया था, जहां विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन व्यवस्था के तहत कांग्रेस से सरकार में भागीदारी की मांग करने का आग्रह करते हुए प्रस्ताव पारित किए गए थे।

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सेल्वापेरुन्थागाई ने स्पष्ट किया कि गठबंधन से जुड़े मामलों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने हमें स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गठबंधन के मुद्दों पर खुले मंचों पर चर्चा न करें। राज्य अध्यक्ष के रूप में, इस निर्देश का बिना किसी विचलन के पालन करना मेरा दायित्व है।

राष्ट्रीय नेतृत्व के अधिकार पर जोर देते हुए उन्होंने आगे कहा कि हमारे नेताओं- राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल ने पार्टी सदस्यों को स्पष्ट रूप से सलाह दी है कि वे गठबंधन के मामलों पर सार्वजनिक रूप से व्यक्तिगत राय व्यक्त करने से बचें। उनका मार्गदर्शन अंतिम है।

अपनी आलोचना में टैगोर का नाम लिए बिना, सेल्वापेरुन्थागाई ने इस मांग के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि कोई विचार या चिंताएं हैं, तो उन्हें पार्टी के उचित मंचों के समक्ष रखा जाना चाहिए। इस तरह के मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाना, विशेष रूप से इस समय, अनावश्यक भ्रम की स्थिति पैदा करता है।

उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी ने डीएमके के साथ बातचीत के लिए पहले ही एक सुव्यवस्थित तंत्र स्थापित कर लिया है। उन्होंने कहा कि सीट बंटवारे की बातचीत के लिए गिरीश चोडंकर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। बातचीत के लिए एक उचित माध्यम मौजूद है और यह प्रक्रिया जारी है।

क्या कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी? इस सवाल पर सेल्वापेरुन्थागाई ने कहा कि मुझे हाईकमान द्वारा वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर विचार-विमर्श करने के लिए बुलाया गया है। सामूहिक निर्णयों या स्थापित निर्देशों की अवहेलना करना आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत नहीं करता।
 

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