एआई पर चर्चा नहीं हुई तो भटक सकता है समाज, समय रहते मंथन जरूरी: प्रसून जोशी

एआई पर चर्चा नहीं हुई तो भटक सकता है समाज, समय रहते मंथन जरूरी: प्रसून जोशी


नई दिल्ली, 16 फरवरी। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) के चेयरपर्सन प्रसून जोशी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 के मंच से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को मानव सभ्यता के लिए एक अभूतपूर्व पड़ाव बताया। आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह ऐसा बदलाव है जो मानव सोच, भविष्य और आपसी संबंधों को नई दिशा दे सकता है।

आईएएनएस से बातचीत में प्रसून जोशी ने इस पहल को ऐतिहासिक उपलब्धि करार देते हुए कहा, "मैं इस आयोजन के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और इससे जुड़े पूरी इंडस्ट्री को दिल से बधाई देता हूं। इस एक्सपो को लेकर आम लोगों में भी खासा उत्साह है।''

प्रसून जोशी ने कहा, "जब भी मस्तिष्क, बुद्धि और वैश्विक चिंतन की बात आती है, भारत हमेशा आगे रहा है। इतिहास पर नजर डालें तो दुनिया को दिशा देने वाले विचार भारत से ही निकले हैं। इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो एक ऐसा मंच है, जहां लोग मंथन कर सकते हैं और तय कर सकते हैं कि एआई के साथ मानव सभ्यता का रिश्ता कैसा होना चाहिए। एआई कोई छोटा बदलाव नहीं है, बल्कि यह ऐसा परिवर्तन है जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।"

उन्होंने आगे कहा, ''अगर एआई के प्रभाव, उसके उपयोग और उससे जुड़े भविष्य पर गंभीर चर्चा नहीं की गई, तो समाज भटक सकता है। एआई मानव जीवन में गहराई से उतर सकता है और खलबली भी मचा सकता है। ऐसे में उस पर विचार-विमर्श बेहद जरूरी है, इसलिए ऐसे मंच तैयार किए जा रहे हैं ताकि तकनीक के साथ-साथ उसके सामाजिक और मानवीय प्रभावों पर भी खुलकर बातचीत हो सके।''

आईएएनएस से बातचीत में आगे उन्होंने भारत की सकारात्मक सोच पर भी जोर दिया। जोशी ने कहा, ''भारत वह जगह है, जहां अलग-अलग विचारों को एक साथ लाकर संवाद किया जाता है। एआई की खासियत यह है कि वह ज्ञान को सबके लिए समान रूप से उपलब्ध कराता है। अब आपके और मेरे बीच ज्ञान के स्तर पर कोई फर्क नहीं रह जाता। हर व्यक्ति के पास वही जानकारी हो सकती है, जो किसी विशेषज्ञ के पास है। सृष्टि के कर्म के हिसाब से यह बिल्कुल सही है, जहां न कोई बड़ा है और न कोई छोटा, सब बराबर हैं।''

प्रसून जोशी ने कहा, ''एआई लोगों को जोड़ने का काम कर रहा है। यह तकनीक समाज में समानता की भावना को मजबूत कर सकती है।''

उन्होंने आलोचकों को भी जवाब देते हुए कहा कि जो लोग भारत की क्षमता पर सवाल उठाते हैं, उन्हें सिलिकॉन वैली जाकर देखना चाहिए कि वहां क्या हो रहा है और भारत इस क्षेत्र में कितनी तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने भारतीय सभ्यता का उदाहरण देते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी कोई नई चीज आई, भारत ने उसे अपनाया, ढाला और अपने मूल्यों के साथ जोड़ा। यही कारण है कि भारतीय सभ्यता हजारों सालों से प्रासंगिक बनी हुई है। भारत के पास महान कला, संस्कृति और विचार परंपरा है, जो एआई जैसी तकनीक को मानव हित के लिए उपयोगी बना सकती है।
 
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