बेरोजगारी और पेपर लीक पर विधानसभा में सरकार 'लापता'! संग्राम यादव बोले- न दिए तथ्यात्मक, न सकारात्मक जवाब

बेरोजगारी, परीक्षाओं में धांधली जैसे मुद्दों पर सकारात्‍मक और तथ्यात्मक जवाब नहीं देती सरकार: संग्राम यादव


लखनऊ, 16 फरवरी। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बेरोजगारी, परीक्षाओं में अनियमितता, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती और दूषित पेयजल जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की।

समाजवादी पार्टी के नेता संग्राम यादव ने कहा कि उन्होंने सदन में नियम 56 के अंतर्गत प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी, परीक्षाओं में धांधली और आरक्षण का पालन न होने का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि सरकार इन सवालों का सकारात्मक और तथ्यात्मक जवाब देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

संग्राम यादव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि यदि सरकार के बजट भाषण, राज्यपाल के अभिभाषण और मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री के बयानों को देखा जाए तो अलग-अलग आंकड़े सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर दो लाख लोगों को नौकरी देने की बात कही जा रही है तो दूसरी ओर आठ लाख से अधिक नौकरियां देने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में विपक्ष ने सरकार से मांग की कि वह वास्तविक आंकड़े सदन के पटल पर रखे। उन्होंने कहा कि विपक्ष कथा सुनने नहीं आया है, बल्कि उसके पास तीखे और ठोस सवाल हैं जिनका स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जवाब देने से बच रही है और अपने कार्यकाल के कामकाज का स्पष्ट ब्योरा नहीं दे रही।

उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्ष 2022 में जारी विज्ञापन के बाद 2025 में पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई, जो सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल खड़ा करता है। अब अप्रैल में नई प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है, लेकिन छात्रों में अब भी अविश्वास का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्थायी नौकरियां देने से बचना चाहती है। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ मंत्री अपने समाज को भागीदारी दिलाने में विफल रहे हैं और जनता आने वाले समय में इसका जवाब देगी।

वहीं, विधानसभा में दूषित पानी से फैल रही बीमारियों के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के नेता कमाल अख्तर ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सरकार की ओर से लिखित जवाब दिया जाता है, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। उनके अनुसार, कई गांवों में सड़कें टूटी हुई हैं और पाइपलाइन की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है। जगह-जगह पाइपलाइन टूटने से जलभराव की स्थिति बन जाती है और टैंक भी धंस जाते हैं।

कमाल अख्तर ने कहा कि सरकार ने 2022 तक हर घर नल देने का वादा किया था, लेकिन 2025 तक भी यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कम से कम लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि संक्रमण, डायरिया और पेट से जुड़ी बीमारियों के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत होती है, जिसकी एक बड़ी वजह दूषित पानी है। नदियों और नहरों के किनारे बसे गांवों में आर्सेनिक की मात्रा चिंताजनक स्तर पर है। वहीं, शहरों में लोग महंगा पानी खरीदने को मजबूर हैं क्योंकि सरकारी जलापूर्ति पर भरोसा कम होता जा रहा है।
 

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