नई दिल्ली, 16 फरवरी। सोमवार से राष्ट्रीय राजधानी में शुरू हुए एआई इम्पैक्ट समिट 2026 को लेकर देश और दुनिया में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया कि इस सम्मेलन की तैयारी करीब एक साल से चल रही थी। पिछले साल फरवरी में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस में आयोजित एआई एक्शन समिट में शामिल हुए थे, तभी उन्होंने घोषणा की थी कि इस साल का समिट भारत में आयोजित होगा।
उन्होंने कहा कि तब से ही इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। कई संस्थानों और संगठनों से संपर्क किया गया, अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए और एक बहुत बड़ा एक्सपो भी लगाया गया। अब तक ढाई लाख से ज्यादा लोगों ने इसमें शामिल होने के लिए पंजीकरण कराया है।
इस सम्मेलन में 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। 40 से ज्यादा देशों के मंत्री इसमें शामिल हो रहे हैं। 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल, 100 से ज्यादा सीईओ और करीब 500 शिक्षाविद एवं सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञ इसमें भाग ले रहे हैं। कुल मिलाकर 460 समानांतर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
एस. कृष्णन ने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें एआई की इस तकनीकी लहर पर सवार होना होगा। जरूरी है कि इस तकनीक का इस्तेमाल देश के हित में किया जाए।
वहीं जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय (एमईटीआई) के उप निदेशक (डिप्टी डायरेक्टर) ताकुमी मियाकावा ने कहा कि जापान में भी एआई को लेकर नई सरकार काफी गंभीर है। उन्होंने बताया कि जापान के प्रधानमंत्री भी एआई के महत्व पर जोर दे चुके हैं। जापान सरकार अपने एआई उद्योग और कंपनियों को मॉडल विकसित करने में सहयोग दे रही है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और जापान एआई के क्षेत्र में खास साझेदार बनेंगे। दोनों देशों की सरकारें इस दिशा में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा कर रही हैं।
इसके अलावा, प्रसार भारती के पूर्व सीईओ और पद्मश्री सम्मानित शशि शेखर वेम्पति ने कहा कि यह भारत के लिए गर्व की बात है कि इतना बड़ा एआई सम्मेलन यहां हो रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों के प्रमुख, उद्योग जगत के नेता, स्टार्टअप्स, युवा इनोवेटर और शोधकर्ता यहां आ रहे हैं। यह दिखाता है कि एआई के क्षेत्र में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर उभरा है। अब वह समय नहीं रहा जब कुछ देश तकनीक के दम पर आगे बढ़ जाएं और बाकी पीछे रह जाएं। आज पूरी दुनिया की नजर इस सम्मेलन के नतीजों पर है।
वेम्पति ने कहा कि जिस तरह पहले भारत इंटरनेट सेवाओं का बड़ा केंद्र बना, उसी तरह अब भारत दुनिया का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोवाइडर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आगे उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना काल में जब कई देशों में वैक्सीन को लेकर डर था, तब भारत ने तेजी से वैक्सीन अपनाई। उसी तरह जब कई देशों में एआई को लेकर आशंकाएं हैं, तब भारत इसे अवसर के रूप में देख रहा है।
उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए आगे कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां अंग्रेजी बोलने वाली आबादी बड़ी है, मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल व्यापक है और डिजिटल सेवाओं का स्तर भी ऊंचा है। साथ ही, एआई टूल्स और एआई साक्षरता का स्तर भी भारत में काफी अच्छा है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट में भी बताया गया कि एआई का उपयोग भारत में तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अब समय है कि भारत अपने खुद के एआई मॉडल और एप्लिकेशन बनाए और सिर्फ विदेशी प्लेटफॉर्म का उपभोक्ता बनकर न रहे। यह एआई इम्पैक्ट समिट देश के स्टार्टअप्स, युवाओं और निवेशकों के लिए एक बड़ा मंच साबित होगा।