श्रीनगर, 16 फरवरी। जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर बदलाव की तस्वीर दिखाई देने लगी है। नई सरकारी योजनाओं, स्टार्टअप स्कीम और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों ने घाटी के युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रेरित किया है।
टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर, हैंडीक्राफ्ट और टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में युवा अपने-अपने वेंचर शुरू कर रहे हैं, जिससे कश्मीर में उभरते स्टार्टअप कल्चर को नई पहचान मिल रही है।
इन्हीं उभरते इनोवेटर्स में दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के युवा उद्यमी शेख जुबैर भी शामिल हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में पहली बार आधुनिक थ्रैशिंग मशीन की शुरुआत की है। उनके इस नवाचार को कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है, क्योंकि इससे किसानों के समय और मेहनत दोनों की बचत होगी। पारंपरिक तरीकों से होने वाली थ्रैशिंग प्रक्रिया में अधिक मजदूरों की जरूरत पड़ती थी, जबकि मशीन के जरिए कम समय में अधिक काम संभव हो पा रहा है।
शेख जुबैर ने बताया कि उनके घर में पहले थ्रैशिंग का काम पुराने तरीके से होता था, जिसमें अधिक श्रम और समय लगता था। साथ ही, मजदूरों की उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या थी।
उन्होंने कहा कि इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मशीन आधारित समाधान विकसित करने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, इस नवाचार से न केवल लागत कम होगी, बल्कि किसानों को फसल कटाई के बाद की प्रक्रिया में भी सहूलियत मिलेगी।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि घाटी के युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती फंडिंग की होती है। किसी भी नए इनोवेशन के लिए शुरुआती चरण में पर्याप्त पूंजी की आवश्यकता होती है, लेकिन अधिकांश युवाओं के पास संसाधनों की कमी रहती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और वित्तीय संस्थान शुरुआती स्तर पर बेहतर सहयोग दें, तो अधिक युवा उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रख सकते हैं।
सरकारी सहायता, वित्तीय मदद और कौशल विकास कार्यक्रमों के चलते कश्मीर में स्वरोजगार की दिशा में सकारात्मक माहौल बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नवाचार न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे, बल्कि युवाओं को रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार देने वाला भी बनाएंगे।