हैदराबाद, 16 फरवरी। तेलंगाना के निकाय चुनावों में करीमनगर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मेयर पद पर कब्जा कर लिया, जबकि निजामाबाद नगर निगम में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने एआईएमआईएम के समर्थन से मेयर की कुर्सी हासिल की।
करीमनगर नगर निगम में कोलागानी श्रीनिवास भाजपा के पहले मेयर निर्वाचित हुए। 66 सदस्यीय निगम में भाजपा 30 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से 34 के बहुमत के आंकड़े तक पहुंच गई।
भाजपा के वाई. सुनील राव उप-मेयर चुने गए। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार, जो पदेन सदस्य भी थे, ने पार्टी के पक्ष में आवश्यक समर्थन जुटाने में अहम भूमिका निभाई।
कांग्रेस के पास केवल 14 सदस्य थे, लेकिन उसे एआईएमआईएम के तीन पार्षदों सहित सात अन्य पार्षदों का समर्थन मिला। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस), जिसके पास नौ सीटें थीं, ने मतदान से दूरी बनाए रखी।
चुनाव से पहले नाटकीय घटनाक्रम में पांच निर्दलीय पार्षद रविवार को कांग्रेस में शामिल हो गए। भाजपा को मेयर पद से रोकने की रणनीति के तहत कांग्रेस ने अपने पार्षदों और समर्थन देने वाले निर्दलीयों को हैदराबाद शिफ्ट कर दिया था।
निजामाबाद नगर निगम में भी भाजपा 60 में से 28 डिवीजनों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन 31 के बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी।
कांग्रेस ने 17 डिवीजन जीते थे, लेकिन एआईएमआईएम (14 सीट) और बीआरएस के एकमात्र पार्षद के समर्थन से मेयर पद हासिल कर लिया। कांग्रेस की उमा रानी मेयर चुनी गईं, जबकि एआईएमआईएम की सलमा तहसीन उप-मेयर बनीं।
इसके साथ ही 11 फरवरी को हुए चुनावों के बाद कांग्रेस ने राज्य की सात में से पांच नगर निगमों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इन चुनावों के साथ ही 116 नगरपालिकाओं के लिए भी मतदान हुआ था।
करीमनगर में जीत से उत्साहित केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने इसे ऐतिहासिक पल बताया। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि यह सिर्फ राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि भावनात्मक क्षण है। उन्होंने कहा कि यह जीत उन सभी कार्यकर्ताओं की है, जिन्होंने दबाव और चुनौतियों के बावजूद पार्टी के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि करीमनगर नगर निगम पर भगवा ध्वज फहराना परिवर्तन और साहस का प्रतीक है। भाजपा ने हर साजिश और दबाव के बावजूद पीछे हटने से इनकार किया और जीत हासिल की।