सरकार की DLI योजना से समर्थित C2i सेमीकंडक्टर्स ने जुटाए 15 मिलियन डॉलर, AI तकनीक को मिलेगी रफ्तार

सरकार की डीएलआई योजना से जुड़ी सी2आई सेमीकंडक्टर्स ने जुटाई 15 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग


नई दिल्ली, 16 फरवरी। सरकार की डीएलआई (डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव) योजना के तहत समर्थित बेंगलुरु स्थित चिप-डिजाइन स्टार्टअप सी2आई सेमीकंडक्टर्स ने पीक एक्सवी पार्टनर्स के नेतृत्व में सीरीज ए फंडिंग राउंड में 15 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग जुटाई है। इसके साथ ही निजी निवेशकों से अब तक कंपनी को कुल मिलाकर लगभग 170 करोड़ रुपए का निवेश मिल चुका है। इसकी घोषणा सोमवार को की गई।

आधिकारिक बयान के अनुसार, यह फंडिंग 2024 में जुटाए गए 4 मिलियन डॉलर की फंडिंग के बाद आया है। सरकारी डीएलआई योजना से मिले सहयोग और इस नई फंडिंग के जरिए कंपनी अगली पीढ़ी के एआई डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पावर मैनेजमेंट सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस के विकास को तेज करेगी।

पीक एक्सवी पार्टनर्स (जिसे पहले सिकोइया कैपिटल इंडिया एंड एसईए के नाम से जाना जाता था) ने सी2आई की नई और अनोखी तकनीक की संभावनाओं को देखते हुए 15 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। इससे हाई-डेंसिटी और बेहद भरोसेमंद सिस्टम-लेवल पावर डिलीवरी सॉल्यूशंस के विकास में तेजी आएगी।

कंपनी को वर्ष 2024 में याली कैपिटल की अगुवाई में 4 मिलियन डॉलर की फंडिंग भी मिली थी, जिससे अब तक कुल निवेश करीब 170 करोड़ रुपए हो चुका है; इसके अलावा डीएलआई योजना का समर्थन अलग से मिला है।

पीक एक्सवी के मैनेजिंग डायरेक्टर राजन आनंदन ने कहा कि सी2आई की पावर मैनेजमेंट तकनीक जीपीयू की उम्र बढ़ा सकती है और इंडस्ट्री को अरबों डॉलर की बचत करा सकती है।

कंपनी ने सर्वर के अंदर बिजली के प्रवाह को नए तरीके से डिजाइन किया है। यह 'ग्रिड टू कोर' अप्रोच का इस्तेमाल करती है, जिससे पावर सोर्स से लेकर प्रोसेसर चिप तक बिजली का प्रवाह ज्यादा कुशल और सुरक्षित तरीके से होता है।

यह नई तकनीक डेटा सेंटर के लिए एक स्मार्ट पावर कंट्रोल सिस्टम की तरह काम करती है, जिससे हाई-परफॉर्मेंस एआई सिस्टम भरोसेमंद, कुशल और लगातार काम कर सकते हैं, जो भविष्य के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बेहद जरूरी है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत का सेमीकंडक्टर कार्यक्रम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग दोनों को मजबूत करने के लिए बनाया गया है, जिसका उद्देश्य देश में बौद्धिक संपदा (आईपी) तैयार करना और वैश्विक स्तर की प्रोडक्ट कंपनियां खड़ी करना है।

भारत का सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है। डीएलआई योजना के तहत समर्थित स्टार्टअप्स में निवेशकों और ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है।

आमतौर पर सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स में लंबी विकास अवधि, भारी रिसर्च और डेवलपमेंट खर्च और ज्यादा तकनीकी जोखिम होता है। डीएलआई योजना, जिसे 2022 में शुरू किया गया था, इन चुनौतियों को कम करने के लिए वित्तीय सहायता, एडवांस ईडीए टूल्स और आईपी कोर तक पहुंच जैसी सुविधाएं देती है।

स्टार्टअप्स को इस योजना में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ समिति द्वारा कड़ी जांच और मूल्यांकन किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भरोसेमंद और डीप-टेक कंपनियों को ही समर्थन मिले।

सरकार का कहना है कि इस तरह की संरचित पहल से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और डीएलआई से जुड़े स्टार्टअप्स में निवेश की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
 

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