उज्जैन, 16 फरवरी। महाशिवरात्रि सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि एक आस्था का अटूट विश्वास से भरा त्योहार है। देश के हर कोने में भगवान शिव को अर्पित त्योहार को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
वहीं उज्जैन में दिल को छू लेने वाला अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां बाबा महाकाल को सप्तधान शृंगार के साथ दूल्हे की तरह सजाया गया है। इसके अलावा, बाबा को सप्तधान से बना 11 फीट का सेहरा भी अर्पित किया गया।
दरअसल आज सोमवार को भगवान महाकाल को साल में एक बार धारण किया जाने वाला सवा मन का पुष्प मुकुट (सेहरा) पहनाया गया। भगवान महाकाल को अभिषेक और पूजा के बाद सेहरा से सजाया गया। सेहरा दर्शन के लिए भी आज मंदिर में बढ़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। प्रतिदिन की तरह आज बाबा की भस्म आरती तड़के 4 बजे नहीं हुई है; यह आज दोपहर को बाबा की भस्म आरती की जाएगी।
सप्तधान शृंगार बाबा के अद्भुत शृंगारों में से एक है जिसमें दर्शन करने का सौभाग्य साल में एक बार ही मिलता है। इसमें अलग-अलग फूलों की माला और सात तरह के अलग अनाज, जिसमें खड़ा मूंग, तिल, मसूर, गेहूं, जौ, खड़ा उड़द और चावल शामिल होते हैं, से बाबा को सजाया जाता है। यह सभी अनाज बाबा के लिए प्रकृति का प्रतीक होते हैं, जिन्हें अर्पित कर अच्छी फसल और खेती के लिए प्रार्थना की जाती है। इन अनाजों को शुभ माना जाता है और यह शृंगार साल में सिर्फ एक बार होता है और इसलिए इसका महत्व बहुत ज्यादा है।
विशेष सेहरा दर्शन और आरती के बाद बाबा के शृंगार में इस्तेमाल हुए अनाज और फलों को भक्तों में बांट दिया जाता है और कुछ हिस्सों को सरकारी खजाने और मंदिर प्रशासन अपने पास रखता है, जिससे भविष्य में कभी भी धन की कमी न हो। सप्तधान के अनाज धन और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। यही कारण है कि आज के सेहरा दर्शन के लिए भक्त बाबा के दर्शन के लिए घंटों लाइन में इंतजार करते हैं और विशेष और अद्भुत शृंगार में सजे बाबा के दर्शन करते हैं। मंगलवार से बाबा महाकाल की दिनचर्या पहले जैसी सामान्य हो जाएगी और भस्म आरती और बाकी छह आरतियां अपने तय समय पर की जाएंगी।