मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने महाशिवरात्रि पर गिरनार तलहटी में पूजे भवनाथ महादेव, संतों का लिया आशीर्वाद

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर स्वयंभू भवनाथ महादेव की पूजा-अर्चना की


गांधीनगर, 15 फरवरी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर गिरनार पर्वत की गोद और भवनाथ तलहटी में बिराजमान स्वयंभू भवनाथ महादेव के श्रद्धाभाव के साथ दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री के साथ ऊर्जा राज्य मंत्री कौशिकभाई वेकरिया भी श्रद्धापूर्वक भवनाथ महादेव के दर्शन और पूजा में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर स्वयंभू भवनाथ महादेव की पूजा-अर्चना की

मुख्यमंत्री ने महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जूनागढ़ में परंपरागत रूप से आयोजित होने वाले पांच दिवसीय महाशिवरात्रि मेले के अंतिम दिन भवनाथ मंदिर परिसर में साधु-संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर उन्हें अंगवस्त्र अर्पित किया और विशेष सम्मान के साथ उनका अभिवादन किया।

संत समागम के लिए प्रसिद्ध इस महाशिवरात्रि के मेले में मुख्यमंत्री ने साधु-संतों के साथ मुलाकात कर आध्यात्मिक चेतना की भी अनुभूति की।

भूपेंद्र पटेल ने भवनाथ मंदिर में स्थित अखंड धूणा (धूनी) के भी दर्शन किए और बाद में मृगी कुंड में श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री ने आस्था के महाकुंभ महाशिवरात्रि के मेले में भवनाथ मंदिर परिसर के सत्संग हॉल में मुक्तानंद बापू, शेरनाथ बापू, हरिहरानंद बापू, महेश गिरि बापू, महेन्द्रानंद गिरि बापू, संपूर्णानंदजी बापू, राजेन्द्रदास बापू, भारद्वाज गिरि बापू, बुद्ध गिरि बापू, सोमनाथ जी बापू सहित अन्य साधु-संतों से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही, उन्होंने साधु-संतों को अंगवस्त्र और माला पहनाकर अभिवादन किया। इस अवसर पर जिले के पदाधिकारी और अधिकारी उपस्थित रहे।

इस मौके पर जिला कलेक्टर अनिल कुमार राणावसिया और गुजरात पवित्र यात्राधाम बोर्ड के सदस्य सचिव रमेश मेरजा ने स्मृति चिह्न भेंट कर मुख्यमंत्री का स्वागत-सम्मान किया। इसके साथ ही ऊर्जा राज्य मंत्री कौशिकभाई वेकरिया का भी स्मृति चिह्न भेंट कर प्रशासन द्वारा स्वागत किया गया।

प्रांत और मेला अधिकारी चरणसिंह गोहिल ने महाशिवरात्रि के मेले के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने भवनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के साथ सहजतापूर्वक बातचीत की और उनका अभिवादन किया।

उल्लेखनीय है कि महाशिवरात्रि के मेले में अलग-अलग अखाड़ों के साधु-संतों और दिगंबर साधुओं की महाशिवरात्रि पर्व पर निकलने वाली रवेड़ी (शाही सवारी) का भी विशेष महत्व है।
 

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