मौसम बदलते ही बच्चे होते हैं बीमार? आयुर्वेद और विज्ञान से समझें कारण और पाएं बीमारियों से बचाने के प्रभावी उपाय

मौसम बदलते ही क्यों बीमार पड़ जाते हैं बच्चे? जानिए बचाव का आसान तरीका


नई दिल्ली, 15 फरवरी। मौसम जब करवट बदलता है, तो सबसे पहले असर बच्चों की सेहत पर दिखाई देता है। सुबह ठंडी हवा, दोपहर में हल्की गर्मी और शाम को फिर ठंडक- यह बदलाव बच्चों के नाजुक शरीर को जल्दी थका देता है। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों मानते हैं कि इस समय बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर हो जाती है, जिससे सर्दी-जुकाम, बुखार, खांसी और गले की परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना सबसे जरूरी होता है।

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर का संतुलन बिगड़ने पर बीमारियां शुरू होती हैं, जबकि विज्ञान की मानें तो, कमजोर इम्यून सिस्टम की वजह से वायरस और बैक्टीरिया आसानी से शरीर पर पकड़ बना लेते हैं। अगर बच्चों की अंदरूनी ताकत मजबूत रहे, तो वे बीमारी से दूर बने रहते हैं।

सबसे पहले बच्चों के खान-पान का ध्यान रखें। बच्चों को हल्का, ताजा और पोषण से भरपूर खाना देना चाहिए। हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें, चावल, रोटी और दूध बच्चों के शरीर को ताकत देते हैं। विज्ञान भी मानता है कि विटामिन, मिनरल और प्रोटीन इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। ज्यादा तला-भुना और बाहर का खाना बच्चों के पेट को कमजोर करता है, जिससे बीमारी जल्दी पकड़ लेती है। गुनगुना पानी या हल्का सूप देने से शरीर अंदर से गर्म रहता है।

साफ-सफाई की आदत भी बच्चों को बीमारियों से बचाती है। ज्यादातर कीटाणु हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं। बच्चों को समझाएं कि खाना खाने से पहले, बाहर खेलकर आने के बाद और बाथरूम के बाद हाथ धोना क्यों जरूरी है। साफ हाथ बच्चों को कई संक्रमणों से बचा सकते हैं और यह आदत उन्हें जीवन भर स्वस्थ रखने में मदद करती है।

शरीर में पानी की कमी भी बच्चों को कमजोर बनाती है। शरीर को अंदर से साफ रखने के लिए तरल पदार्थ जरूरी हैं। बच्चों को दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पिलाते रहें। नारियल पानी, छाछ या घर का बना फलों का रस शरीर को ठंडा-संतुलित रखता है और विषैले तत्वों को बाहर निकालता है।

अच्छी नींद बच्चों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। दरअसल, नींद के दौरान शरीर खुद को ठीक करता है। अगर बच्चे पूरी नींद लेते हैं, तो उनका शरीर बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार रहता है। रोजाना तय समय पर सोना और जागना बच्चों की आदत बन जाए, तो उनका मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं।
 
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