नई दिल्ली, 15 फरवरी। वो 16 फरवरी 1968 का ही दिन था जब अमेरिका के अलबामा राज्य के हैलीविल शहर में इतिहास रचा गया। इस दिन दोपहर 2 बजे, हैलीविल के मेयर ऑफिस से पहली 911 कॉल की गई। कॉल करने वाले थे अलबामा हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के स्पीकर रैंकिन फाइट, जो मेयर जेम्स व्हिट के ऑफिस से कॉल कर रहे थे। कॉल रिसीव हुई पुलिस स्टेशन में, जहां यूएस रिप्रेजेंटेटिव टॉम बेविल ने फोन उठाया और सिर्फ "हैलो" कहा। यह एक औपचारिक कॉल थी, जिसमें कोई असली इमरजेंसी नहीं थी, बल्कि सिर्फ सिस्टम का टेस्ट था।
कॉल अलबामा हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सदस्य रैंकिन फाइट ने की थी और इसे स्थानीय पुलिस स्टेशन में स्थापित विशेष प्रणाली के माध्यम से प्राप्त किया गया। इस ऐतिहासिक पहल ने आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत करने की दिशा में नई शुरुआत की।
अमेरिकी पत्रकार गैरी ए पोमेरान्ट्ज की पुस्तक 'नाइन मिनट्स, 20 सेकंड्स' में अमेरिका की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की संरचना और उसकी चुनौतियों का विश्लेषण मिलता है। हालांकि यह पुस्तक विशेष रूप से एक विमान दुर्घटना पर केंद्रित है, लेकिन इसमें अमेरिकी आपातकालीन सेवाओं के ढांचे और 911 प्रणाली के महत्व का जिक्र किया गया है।
लेखक जॉर्ज डी. हैडो, जेन ए. बुलॉक और डेमन पी. कोपोला की एक किताब में 911 सेवा की स्थापना को आधुनिक आपदा प्रबंधन प्रणाली की आधारशिला के रूप में वर्णित किया गया। पुस्तक के अनुसार, 1960 के दशक में एक राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर की आवश्यकता महसूस की गई क्योंकि विभिन्न शहरों में अलग-अलग नंबर होने से त्वरित सहायता में बाधा आती थी।
तो हुआ यूं कि... 1967 में अमेरिकी संघीय संचार आयोग और 'एटीएंडटी' के बीच विचार-विमर्श के बाद 911 को एक यूनिवर्सल आपातकालीन नंबर के रूप में चुना गया। 16 फरवरी 1968 को हैलीविल में की गई पहली कॉल ने इस प्रणाली को औपचारिक रूप से शुरू किया। इसके बाद यह सेवा पूरे अमेरिका में फैल गई और धीरे-धीरे अन्य देशों ने भी इसी तरह की केंद्रीकृत आपातकालीन नंबर प्रणाली को अपनाया।
जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि 1960 के दशक से पहले अमेरिका में आपातकालीन मदद मांगने का कोई एकीकृत तरीका नहीं था। लोग पुलिस, फायर ब्रिगेड या एम्बुलेंस के लिए अलग-अलग नंबर डायल करते थे, जो अक्सर फोन बुक से ढूंढने पड़ते थे। ग्रामीण इलाकों में तो कभी-कभी पटाखे फोड़कर या जोर से आवाज देकर मदद मांगी जाती थी।
प्रक्रिया मुख्य तौर पर 1957 से शुरू हुई थी। तब 'नेशनल एसोसिएशन ऑफ फायर चीफ्स' ने एक सिंगल नंबर की सिफारिश की, और 1967 में प्रेसिडेंट लिंडन जॉनसन की 'कमीशन ऑन लॉ एनफोर्समेंट' ने भी इसकी जरूरत बताई। उसी साल, 'अमेरिकन टेलीफोन एंड टेलीग्राफ' ने घोषणा की कि 911 को पूरे अमेरिका में आपातकालीन नंबर बनाया जाएगा। यह नंबर इसलिए चुना गया क्योंकि यह छोटा, याद रखने में आसान और किसी भी फोन से डायल किया जा सकता था।
लेकिन 'एटीएंडटी' की योजना को लागू होने में समय लगता, इसी बीच अलबामा टेलीफोन कंपनी (एटीसी) ने फैसला किया कि वे इससे पहले ही इसे लागू कर देंगे। एटीसी ने हैलीविल को चुना, जहां कंपनी का मुख्यालय था और आबादी सिर्फ 4,500 के आसपास थी।