म्यूनिख में वांग यी का जापान को दो टूक: थाइवान पर टिप्पणी खतरनाक, ऐतिहासिक गलती मत दोहराओ

म्यूनिख में वांग यी ने जापान और अमेरिका के साथ संबंधों पर रखे विचार


बीजिंग, 15 फरवरी। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान 'विश्व में चीन' सत्र को संबोधित करते हुए चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने शनिवार को जापान के खतरनाक रुझानों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि थाइवान मुद्दे पर जापानी नेतृत्व की गलत टिप्पणियां सीधे तौर पर चीन की संप्रभुता और युद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देती हैं।

विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि वर्तमान जापानी प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि थाईवान जलडमरूमध्य में कोई भी आकस्मिकता जापान के लिए 'अस्तित्व के लिए खतरा' पैदा करेगी। यह युद्ध के बाद 80 वर्षों में पहली बार है जब किसी जापानी प्रधानमंत्री ने ऐसा बेतुका बयान दिया है।

उन्होंने जापान और जर्मनी के ऐतिहासिक दृष्टिकोण की तुलना करते हुए कहा कि जहां जर्मनी ने फासीवाद का पूर्ण परिसमापन किया और नाजीवाद पर प्रतिबंध लगाया, वहीं जापान आज भी श्रेणी-ए युद्ध अपराधियों को सम्मानित करता है और उनके मंदिरों में जापानी नेता प्रार्थना करने जाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि थाईवान पर कब्जा करने और उपनिवेश बनाने की जापान की महत्वाकांक्षा समाप्त नहीं हुई है और सैन्यवाद का भूत अभी भी मंडरा रहा है।

वांग यी ने जापान से आग्रह किया कि वह इतिहास के सबक से सीखे और पश्चाताप करे, अन्यथा वह वही गलतियां दोहराएगा। उन्होंने सभी शांति-प्रेमी देशों से जापान को चेतावनी देने की अपील की कि यदि वह फिर से गलत रास्ते पर जाता है, तो यह उसके स्वयं के विनाश का कारण बनेगा।

इसी सत्र में चीनी विदेश मंत्री ने चीन-अमेरिका संबंधों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि दुनिया की दो बड़ी ताकतों के रूप में चीन और अमेरिका का सह-अस्तित्व अंतरराष्ट्रीय स्थितियों की दिशा तय करता है। चीन ने हमेशा अमेरिका के साथ अपने संबंधों को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखा है।

विदेश मंत्री ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दशकों के अनुभवों को सारांशित करते हुए प्रस्ताव दिया है कि दोनों देश एक-दूसरे का सम्मान करें, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व बनाए रखें और आपसी लाभ वाले सहयोग को आगे बढ़ाएं। चीन इस दिशा में आगे बढ़ता रहेगा, लेकिन यह अमेरिका के रवैये पर भी निर्भर करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह सुखद है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और चीनी जनता का सम्मान करते हैं और उन्होंने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने चेताया कि अमेरिका में अभी भी कुछ लोग चीन को रोकने और दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

चीनी विदेश मंत्री ने चीन-अमेरिका संबंधों के समक्ष दो संभावित परिदृश्य रेखांकित किए। पहला सहयोग का, जिससे दोनों देशों और दुनिया को लाभ होगा। दूसरा टकराव का, जो चीन से आपूर्ति श्रृंखला को अलग करने, चीन पर अंकुश लगाने और 'थाइवान की स्वतंत्रता' की साजिश रचने जैसे कदमों से उत्पन्न होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे कदम दोनों देशों को टकराव की ओर ले जाएंगे और चीन अपनी लाल रेखाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

विदेश मंत्री वांग यी ने अंत में कहा कि चीन पहले अवसर की उम्मीद करता है, लेकिन विभिन्न जोखिमों से निपटने के लिए भी तैयार है। उन्होंने विश्वास जताया कि आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और आपसी लाभ वाला सहयोग ही एकमात्र सही विकल्प है और यह दृष्टिकोण अंततः प्रबल होगा।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
 
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