शाह बोले: डिजिटल इंडिया गरीबों को देगा सस्ता अनाज, भारत है दुनिया के आधे डिजिटल लेन-देन का सरताज

मोदी सरकार में डिजिटल इंडिया गरीबों को सस्ता अनाज देने के क्षेत्र में पदार्पण कर रहा: अमित शाह


गांधीनगर, 15 फरवरी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गुजरात के गांधीनगर में देश का फर्स्ट सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी)-बेस्ड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) लॉन्च करते हुए कहा कि दुनिया के कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन में आधे से ज्यादा हिस्सा भारत का है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि "डिजिटल इंडिया" शब्द का मैं जब प्रयोग करता हूं और 11 साल पहले मुड़कर देखते हैं तो कल्पना नहीं कर सकते कि 60 करोड़ लोग ऐसे थे, जिनके परिवार में बैंक अकाउंट नहीं था। आज यही 11 साल बाद पीएम मोदी के नेतृत्व में दुनिया के आधे डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत में हो रहे हैं। मतलब दुनिया में 2 डिजिटल ट्रांजेक्शन होते हैं तो एक भारत में होता है। आज वही डिजिटल इंडिया गरीबों को सस्ता अनाज देने के क्षेत्र में पदार्पण कर रहा है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से डीबीटी ने देश में 15 लाख करोड़ से ज्यादा घपले-घोटालों को समाप्त कर दिया, उसी तरह से खाद्य आपूर्ति मंत्रालय का यह कदम ट्रांसपेरेंट डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम सुनिश्चित करेगा और पीएम मोदी के मंत्र 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' को जमीन पर उतारेगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि 11 साल पहले का समय मुझे याद है। सबसे पहले भ्रष्टाचार की शुरुआत अनाज को तौलने में होती थी। उसके वेट करने वाले स्केल को डिजिटल किया गया। राशन कार्ड फर्जी होते थे, लेकिन अब ई-राशन कार्ड ला दिया गया, फिर 'वन नेशन, वन राशन कार्ड’ आया और अब यह जो सिस्टम शुरू हुआ है, इससे और पारदर्शिता होगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल इंडिया के माध्यम से ढेर सारी पारदर्शिता गांवों तक पहुंचाई। कांग्रेस की सरकार में 500 गांवों तक ही कनेक्टिविटी पहुंची थी, लेकिन आज 1 लाख 7 हजार गांवों में कनेक्टिविटी पहुंची है। पीएम मोदी के उस उद्गार को, जब उन्होंने 2014 में कहा था कि 'मेरी सरकार गरीबों की, दलितों की, पिछड़ों की, आदिवासियों की सरकार है और मेरी सरकार में पहला अधिकार इनका है, उस समय हम भावुक होकर देख रहे थे।

उन्होंने कहा कि आज वही चीज मुस्कराकर देखते हैं कि 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो मिल रहा है। 81 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा, यानी पूरे यूरोपियन यूनियन की आबादी से लगभग दो गुना अधिक लोगों को खाद्य सुरक्षा देने का कार्यक्रम है।

उन्होंने पिछले एक दशक में किए गए कल्याणकारी कामों का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया कि 'प्रधानमंत्री आवास योजना' के तहत चार करोड़ घर बनाए गए हैं, 13 करोड़ घरों में नल के पानी के कनेक्शन दिए गए हैं, लगभग 13 करोड़ घरों में गैस सिलेंडर दिए गए हैं, और 12 करोड़ घरों में टॉयलेट बनाए गए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि 2.91 करोड़ महिलाएं 'लखपति दीदी' बन गई हैं, जो सबको साथ लेकर चलने वाले विकास की बड़ी कोशिशों को दिखाता है।
 

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