चेन्नई, 15 फरवरी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अंतरराष्ट्रीय वेल्लालार सम्मेलन में राज्य की सांस्कृतिक पहचान को 'नए रंगों में रंगने' की कोशिशों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि रामलिंग अडिगल वेल्लालार के करुणा और समानता के सिद्धांतों को कमजोर करने या उन्हें विभाजनकारी रूप में पेश करने की किसी भी कोशिश को तमिलनाडु स्वीकार नहीं करेगा।
तमिलनाडु में हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग द्वारा आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने लोगों से वेल्लालार की शिक्षाओं की मूल भावना को सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रेम, नैतिकता, संस्कृति, और करुणा पर आधारित समाज ही सच्चे अर्थों में प्रगतिशील समाज होता है।
स्टालिन ने वेल्लालार के 'थनिपेरुम करुणै' यानी अनंत करुणा के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि संत ने भूख को एक बीमारी माना था और गरीबों को भोजन कराना सर्वोच्च सेवा बताया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियां भी इसी विचार से प्रेरित हैं। उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चों के लिए मुख्यमंत्री नाश्ता योजना और बुजुर्गों के लिए सहायता कार्यक्रम गरीबी और भूख से होने वाली पीड़ा को कम करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे हैं।
धार्मिक बंदोबस्ती क्षेत्र में उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 4,192 मंदिरों में, जहां दशकों से कुंभाभिषेक नहीं हुआ था, वहां पुनर्निर्माण कार्य पूरे कर लिए गए हैं। इसके अलावा 12,900 से अधिक मंदिरों में लगभग 8,100 करोड़ रुपए की लागत से मरम्मत और संरक्षण कार्य जारी है, जिनमें हजारों परियोजनाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने वेल्लालार की स्मृति में सात नई पहल की भी घोषणा की। इनमें सम्मेलन स्थल पर स्मारक स्तंभ का निर्माण, वडालुर में सनमार्ग प्रशिक्षण विद्यालय की स्थापना, 'थिरुवारुत्पा' संगीत कक्षाएं और हर्बल गार्डन शामिल हैं। साथ ही 'स्पिरिचुअल अल्केमी' पुस्तक का प्रकाशन, वल्लालार जयंती का तीन दिवसीय वार्षिक आयोजन, मेट्टुकुप्पम, मरुदुर और करुंगुज़ी में अन्नदान केंद्र, कडलूर कलेक्टर कार्यालय के पास पार्क का नामकरण और चेन्नई में वल्लालार शोध केंद्र की स्थापना भी शामिल है।
स्टालिन ने कहा कि समानता और सामाजिक न्याय केवल नारे नहीं, बल्कि सरकार की प्रतिबद्धता हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे वेल्लालार के करुणा और मानवता के संदेश को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।